Allah कि दी हुई चीजो का sukar अदा कीजिए | Allah ने badmash लड़के को कैसे हिदायत दे दी ? – Dawat~e~Tabligh

Allah के Jimmedari में कौन लोग हैं? पाँच आदमी अल्लाह की ज़िम्मेदारी में हैं Allah का shukar दिल से अदा करना।  Allah कि दी हुई चीजो का sukar अदा कीजिए | Allah ने badmash लड़के को हिदायत दी – Dawat~e~Tabligh in Hindi..

Allah कि दी हुई चीजो का sukar अदा कीजिए | Allah ने badmash लड़के को कैसे हिदायत  दे दी ? - Dawat~e~Tabligh
Allah कि दी हुई चीजो का sukar अदा कीजिए | Allah ने badmash लड़के को कैसे हिदायत दे दी ? – Dawat~e~Tabligh

Allah ने badmash लड़के को कैसे हिदायत दे दी ?

  • अल्लाह की रहमत ने अब्दुल्लाह का हाथ पकड़ा

हज़रत अब्दुल्लाह की यह घिनौनी ज़िंदगी देखकर मां-बाप की बुरी हालत थी। न खाना अच्छा लगता, न पीना। अंदर ही अंदर कुढ़ते और रोते । बेटे की तर्बियत के लिए उन्होंने क्या कुछ न किया था लेकिन इंसान के बस में क्या है। दिलों का फेरना तो अल्लाह के इख़्तियार में है। अब भी जो उनसे वन आता करते रहते। नज़रें मानते सदके देते, अल्लाह से रो-रोकर दुआएं करते।

एक रात अब्दुल्लाह के सारे यार दोस्त जमा थे। गाने-बजाने की महफ़िल खूब गर्म थी। शराब के दौर पर दौर चल रहे थे और हर एक नशे में मस्त था। इतिफाक से हज़रत अब्दुल्लाह की आंख लग गई और उन्होंने एक अजीब व गरीब ख्वाब देखा क्या देखते हैं कि एक लम्बा-चौड़ा खूबसूरत बाग है और एक टहनी पर एक प्यारी चिड़िया बैठी हुई है, और अपनी सुरीली मीठी आवाज़ में कुरआन शरीफ़ की यह आयत पढ़ रही है :

“क्या अभी तक वह घड़ी नहीं आई कि अल्लाह का ज़िक्र सुनकर मोमिनों के दिल लरज जाएं और नर्म पड़ जाएं।”

(सूरह हदीद 16)

हज़रत अब्दुल्लाह घबराए हुए उठे। उनकी ज़बान पर यह बोल जारी थे, “अल्लाह तआला वह घड़ी आ गई।” उठे, शराब की बोतलें पटक दीं, चंग व सितार चूर कर दिए, रंगीन कपड़े फाड़ डाले और गुस्ल करके सच्चे दिल से तौबा की, अल्लाह से पक्का अहद किया कि अब कभी तेरी नाफ़रमानी न होगी। फिर कभी किसी बुराई के क़रीब न फटके और गुनाहों से ऐसे पाक हो गए कि गोया कभी कोई गुनाह किया ही न था सच है तौबा है ही ऐसी चीज़। अगर आदमी सच्चे दिल से अल्लाह से अहद कर ले और बुराइयों से बचने का पक्का इरादा कर ले तो फिर अल्लाह तआला ऐसे आदमी की मदद फरमाता है और नेकी की राह सुझाता है, फिर नेकी की राह पर चलना उसके लिए आसान हो जाता है। और बुराई की राह पर जाना इतना मुश्किल हो जाता है जितना दहकती हुई आग में कूद पड़ना आदमी को कभी भी अल्लाह की ज्ञात से मायूस न होना चाहिए।

एक वह जमाना था कि अब्दुल्लाह रात रात भर गुनाहों में लतपत रहते, ख़ुदा और रसूल की नाफरमानी करते और हर एक को उनकी जिंदगी से पिन आती। लेकिन जब उन्होंने सच्चे दिल से तौबा की, अपने गुनाहों पर शर्मिन्दा हुए और अपने अल्लाह से पुरता अहद किया कि अब जीते जी कभी बुराई के क़रीब भी न फटकेंगे तो अल्लाह की रहमत ने उनका हाथ पकड़ा, नेकी की राह पर लगाया और ऐसे नेकों के नेक बने कि अपने ज़माने के तमाम उलमा ने उनको अपना सरदार माना हदीस के इमाम कहलाए। और आज तक दुनिया उनकी नेकी और इल्म से फ़ायदा उठा ती है।

Allah का shukar दिल से अदा करना 

  • आप के दिल में आ गया कि मैं अल्लाह तआला की नेमतों का शुक्र अदा नहीं कर सकता गोया कि आपने शुक्र अदा कर लिया।

हज़रत मूसा अलैहि० ने एक मर्तबा अल्लाह रब्बुल इज़्ज़त से अर्ज़ किया कि ऐ अल्लाह “कैफ़ अश्रुक मैं आपका शुक्र कैसे अदा करूं? क्योंकि आपकी एक-एक नेमत ऐसी है कि में सारी ज़िन्दगी भी इबादत में लगा रहूं तो मैं सिर्फ एक नेमत का भी शुक्र अदा नहीं कर सकता, और आपकी तो वेइंतिहा नेमतें हैं। मैं उन सब नेमतों का शुक्र कैसे अदा कर सकता हूं? जब उन्होंने यह कहा तो अल्लाह ने उसी वक़्त उन पर वही नाज़िल फ़रमाई और फ़रमाया कि “ऐ मूसा ! अगर आपके दिल में यह बात है कि आप सारी ज़िन्दगी शुक्र अदा करें तो भी शुक्र अदा नहीं कर सकते तो सुन लें कि “अल आ-न शकरतनी” अब तो आपने मेरा शुक्र अदा करने का हक़ अदा कर दिया है” सुहानल्लाह

Allah कि दी हुई चीजो का sukar अदा कीजिए

  • अल्लाह तआला की नेमतों का शुक्र अदा कीजिए

एक मर्तबा सुलैमान बिन हरव रह० तशरीफ़ फ़रमा थे। वक़्त का बादशाह हारून रशीद उस वक़्त उनके दरबार में मौजूद था। हारून रशीद की प्यास लगी। उसने अपने ख़ादिम से कहा कि मुझे पानी पिलाओ। खादिम एक ग्लास में ठंडा पानी लेकर आया। जब बादशाह ने ग्लास हाथ में पकड़ लिया तो सुलैमान बिन हरव रह० ने उनसे कहा कि बादशाह सलामत! जरा रुक जाइए। वह रुक गए। उन्होंने कहा कि मुझे एक बात बताइए कि जैसे आपको अभी प्यास लगी है ऐसे ही आपको प्यास लगे और पूरी दुनिया में उस पानी के सिवा कहीं और पानी न हो तो आप यह बताएं कि आप इस प्वाले को कितनी कीमत में खरीदने पर तैयार हो जाएंगे? हारून रशीद ने कहा, मैं तो आधी सल्तनत दे दूंगा।

फिर सुलैमान बिन हरब रह० ने फ़रमाया कि अगर आप यह पानी पी लें और यह आपके पेट में चला जाए, लेकिन अंदर जाकर आपका पेशाब बन्द हो जाए और फिर वह निकल न पाए और पूरी दुनिया में सिर्फ़ एक डॉक्टर या हकीम हो जो इसे निकाल सकता हो तो बताइए कि इसको निकालने की फ़ीस कितनी देंगे? सोच कर हारून रशीद ने कहा, बक्रिया आधी सल्तनत भी उसको दे दूंगा। वह कहने लगे, वादशाह सलामत! ज़रा गौर करना कि आपकी पूरी सल्तनत पानी का एक प्याला पीने और पेशाब बनकर निकलने के बराबर है।

अगर हम अल्लाह रब्बुल इज्जत की नेमतों पर गौर करें तो फिर दिल से यह आवाज़ निकलेगी कि हमें अपने रब का बहुत ज़्यादा शुक्र अदा करना चाहिए। हम पर तो उसकी बड़ी नेमतें हैं। हम तो वाक़ई उनका शुक्र अदा ही नहीं कर सकते।

माद्दी एतिवार से अल्लाह रब्बुल इज़्ज़त की जितनी नेमतें आज हैं उतनी इससे पहले नहीं थीं। आज का आम बन्दा भी पहले वक़्त के बादशाहों से कई मामलात में बेहतर ज़िन्दगी गुज़ार रहा है। पहले वक़्त के बादशाहों के घरों में घी के चराग जलते थे जबकि आज के ग़रीब आदमी के घर में भी बिजली का क्रमका जलता है। ऐसी रौशनी पहले वक़्त के बादशाहों को भी नसीब नहीं थी। बादशाहों के खादिम उनको हाथ से पंखा किया करते थे जबकि आज के ग़रीब आदमी के घर में भी बिजली का पंखा मौजूद है। जो ठंडा पानी आज एक आदमी को हासिल है वह पहले वक्त के बादशाहों को भी हासिल नहीं था।

उस पर क़यास करते जाइए कि पहले वक़्त के बादशाह अगर सफ़र करते थे तो उनको घोड़ों पर सफर करना पड़ता था और उन्हें एक एक महीने सफ़र में लग जाता था। आप घोड़े पर सवार होकर दिल्ली से मुम्बई जाना चाहे तो यह एक दिन सवार होगा और दूसरे दिन सूरज डूबने से पहले मुम्बई पहुंच चुका होगा। पहले वक्त के बादशाहों को सिर्फ मौसम के फल मिलते थे जबकि आज एक आम ग़रीब आदमी को भी बेमौसम के फल नसीब हैं। पहले इलाकाई फल मिला करते थे जबकि आज आदमी को दूसरे मुल्कों के फल भी हासिल हो जाते हैं और यह मजे से खा रहा होता है। अल्लाह तआला ने अपने बन्दों की कमज़ोरी को देखते हुए ये नेमतें आम कर दी।

गोया मादी एतिवार से नेमतों की जितनी बारिश आज है उतनी पहले कभी नहीं थी लेकिन उसके बावजूद अल्लाह तआला की जितनी नाशुक्री आज है, उससे पहले कभी नहीं थी जिसकी जबान से सुनो, उसकी जबान पर नाशुक्री है, हर बन्दा कहेगा कि कारोबार अच्छा नहीं, घर में मुश्किलात हैं और सेहत खराब है हज़ारों में से कोई एक बन्दा होगा जिससे बात करें तो वह अल्लाह का शुक्र अदा करेगा। आख़िर वजह क्या है? खाने पीने की बहुतायत का यह आलम है कि आज का फ़क़ीर और भिखारी भी रोटी नहीं मांगता बल्कि सिगरेट पीने के लिए दो रुपये मांगता है। इसलिए कि उसे नशा करना है, और मज़ीद बात यह है कि वही भिखारी मोबाइल फ़ोन उठाए फिरता हुआ मिलेगा। नागपाड़ा पर एक फ़क़ीर को 2 रुपये दिए, उसने जेब में से 5 रुपये निकाल कर मुझे दिए कि बच्चों को चाय पिला देना, अब 2 रुपये का ज़माना नहीं है ।

Allah के Jimmedari में कौन लोग हैं ? 

  • पाँच आदमी अल्लाह की ज़िम्मेदारी में हैं

हज़रम मआज़ बिन जबल फ़रमाते हैं, मैंने हुज़ूर सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम को फ़रमाते हुए सुना है कि-

  1. आदमी अल्लाह के रास्ते में निकलता है वह अल्लाह की ज़िम्मेदारी में होता है। 

2. और जो किसी बीमार की इयादत करने जाता है, वह भी अल्लाह की ज़िम्मेदारी में होता है।  

3. और जो सुबह या शाम को मस्जिद में जाता है वह भी अल्लाह की ज़िम्मेदारी में होता है।  

4. और जो मदद करने के लिए इमाम के पास जाता है वह भी अल्लाह की ज़िम्मेदारी में होता है। 

5. और जो घर बैठ जाता है और किसी की बुराई और गीबत नहीं करता वह भी अल्लाह की ज़िम्मेदारी में होता है।

 – ह्यातुस्सहाबा हिस्सा 2, पेज 815

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