क़ियामत की तारीख़ ky hai? Maidan-e-Hashr | सूर और सूर का फूंका जाना | Dawat-e-Tabligh

क़ियामत की तारीख़ ky hai? Maidan-e-Hashr | सूर और सूर का फूंका जाना | Dawat-e-Tabligh

Maidan-e-Hashr
पूछा कि क़ियामत कब कायम होगी, तो उनके इस सवाल के जवाब में प्यारे नबी ने इर्शाद फ़रमाया कि— क़ियामत की तारीख़ ky hai? Maidan-e-Hashr | सूर और सूर का फूंका जाना | Dawat-e-Tabligh परिचय क़ियामत की निशानियां इस नाचीज़ ने एक किताब में जमा कर दी हैं जो 'रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम की पेशीनगोइयां' के नाम से छप चुकी हैं इसलिए कियामत की निशानियों को उसी में पढ़ लें। अब उन लोगों का मुख़्तसर हाल लिखकर जिन पर कियामत कायम होगी, कियामत के हालात लिखना शुरू करता हूँ । वल्लाहु वलीयुत्तौफीक व हु व ख़ैरु औनिॐ व ख़ैरु र्रफ़ीक़ । कियामत किन लोगों पर कायम होगी ? हज़रत अब्दुल्लाह बिन मस्ज़द से रिवायत है कि हज़रत रसूले करीम ने इर्शाद फ़रमाया कि क़ियामत सबसे बुरी मख़्लूक पर कायम…
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इन्सानों का कब्रों से निकलना Maidan-e-Hashr| काफिरों की आंखें कैसे होंगी? | Dawat-e-Tabligh

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"और हम उनको क़ियामत के दिन अंधे, बहरे, गूंगे करके चेहरों के बल चलाएंगे,' कब्रों से बे-ख़त्ना के निकलेंगे। आपस में कहते होंगे कि दुनिया में बस तुम दस दिन रहे।'....  इन्सानों का कब्रों से निकलना हज़रत अब्दुल्ला बिन उमर  रिवायत फ़रमाते हैं कि प्यारे नबी ने इरशाद फरमाया कि सबसे पहले ज़मीन फटकर मुझे ज़ाहिर करेगी; फिर अबू बक्र  व हज़रत उमर क़ब्रों से जाहिर होंगे। फिर बकी (कब्रिस्तान) में जाऊंगा। इसलिए वे (क़ब्रों से निकल कर ) मेरे साथ जमा कर दिए जाएंगे। फिर मैं मक्का वालों का इन्तिज़ार करूंगा, (यहां तक कि वे भी क़ब्रों से निकल कर मेरे साथ हो जाएंगे) फिर मैं हरमैन (वालों) के दर्मियान (महशर में) जमा हो जाऊंगा। जिन्को kabar में दफ़न ना किया हो उनका क्या होगा ? जो लोग क़ब्रों…
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Duniya khatam hone ke baad चांद, सूरज और सितारे ka ky haal Hoga?| Dawat-e-Tabligh

Duniya khatam hone ke baad चांद, सूरज और सितारे ka ky haal Hoga?| Dawat-e-Tabligh

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'जब सूरज बेनूर हो जाएगा और जब सितारे टूटकर गिर पड़ेंगे (सूरः इन्फितार में फ़रमाया :)। उस दिन सितारों की रौशनी ख़त्म कर दी जाएगी।......  Duniya kaise khatam hogi?  Duniya khatam hone ke baad चांद, सूरज और सितारे ka ky haal Hoga?| Dawat-e-Tabligh कायनात का बिखर जाना सूर फूंके जाने से न सिर्फ ये इंसान मर जाएंगे बल्कि कायनात का निज़ाम ही टूट जाएगा। आसमान फट जाएगा; सितारे झड़ जाएंगे और बेनूर हो जाएंगे; चांद व सूरज की रोशनी ख़त्म कर दी जाएगी; ज़मीन हमवार मैदान बन जाएगी; पहाड़ उड़ते फिरेंगे। नीचे की आवतों व हदीसों से ये बातें साफ़-साफ़ ज़ाहिर हो रही हैं । Duniya khatam hone ke baad पहाड़ों का हाल ky Hoga?  अल्लाह का इर्शाद है : अल् कारि अ तु मल् कारिअः । व मा अद्रा…
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क्या मुर्दा जिंदा हो सकता है ?| KY कियामत hogi? | Dawat-e-Tabligh

क्या मुर्दा जिंदा हो सकता है ?| KY कियामत hogi? | Dawat-e-Tabligh

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कहता है कि मियां ! गली सड़ी हड्डियों को कौन जिंदा करेगा ? "क्या जब हम मर गये और मिट्टी और हड्डियां ही हड्डियां हो गये तो क्या हम उठाये जाएंगे? क्या हमारे अगले बाप-दादे भी उठाये जाएंगे?..... क्या मुर्दा जिंदा हो सकता है?| KY कियामत hogi?| Dawat-e-Tabligh क्या मुर्दा जिंदा हो सकता है? क़ियामत का आना ज़रूरी है। कोई माने या न माने। वादा सच्चा है। जो होकर रहेगा। जिस वक़्त कुरआन करीम नाज़िल होता था उस वक्त भी क़ियामत के इंकारी थे और आज भी इस साबित सच्चाई से इंकार करने वाले मौजूद हैं। वह्य नाज़िल होते वक्त जो लोगों को इस बारे में शक व शुब्हे थे; बहुत-से मौकों पर क़ुरआन शरीफ़ में उनके जवाब दिए गये हैं। नीचे कुछ आयतें इसी से मुतआल्लिक़ लिखी जाती हैं।…
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Duniya kab tak chalegi| Mout क्यू आति है?| Dawat-e-Tabligh

Duniya kab tak chalegi| Mout क्यू आति है?| Dawat-e-Tabligh

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जिस तरह इंसानों और जिन्नों की उम्र मुकर्रर हैं; उसी तरह दुनिया की उम्र भी मुकर्रर है। ‘जिसने पैदा किया मौत को और जिंदगी को ताकि तुमको जांचा जाए कि तुम में कौन अच्छे काम करता है।'... Duniya kab tak chalegi| Mout क्यू आति है?| Dawat-e-Tabligh परिचय मरने के बाद दोबारा जिन्दा होना, हश्र का काइम होना और हिसाब व किताब लिया जाना इस्लाम के बुनियादी अकीदों में शामिल है। दुनिया की जिन्दगी में किया जाने वाला छोटे से छोटा और बड़े से बड़ा अमल उस दिन इन्सान के सामने आ जायेगा और अच्छा या बुरा जैसा भी वह अमल होगा उसका बदला भी ज़रुर दिया जायेगा। वहां न कोई असर व रसूख काम आयेगा, न धन दौलत और न कोई सिफारिश इस किताब में कुरआन मजीद और हदीस शरीफ़…
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