Logo के साथ किस तरह रहे ता कि वो आप से jud कर रहे? | Gareebo के बीच कैसर रहे ? – Dawat~e~Tabligh

लोगो के दिल में अपनी कदर कैसे डालें ? बताया कि वह रकम अदा करनेवाले हज़रत अब्दुल्लाह रह० थे। सोचने की बात। मख़्लूक़  के साथ अच्छा सुलूक । Logo के साथ किस तरह रहे ता कि वो आप से jud कर रहे? | Gareebo के बीच कैसर रहे ? – Dawat~e~Tabligh in hindi…

Logo के साथ किस तरह रहे ता कि वो आप से jud कर रहे? | Gareebo के बीच कैसर रहे ? - Dawat~e~Tabligh
Logo के साथ किस तरह रहे ता कि वो आप से jud कर रहे? | Gareebo के बीच कैसर रहे ? – Dawat~e~Tabligh

लोगो के दिल में अपनी कदर कैसे डालें ?

  • सोचने की बात

सोचने की बात यह है कि क्यों लोग हज़रत अब्दुल्लाह रह० को दिल व जान से चाहते थे? और क्यों आप पर जान छिड़कते थे ?

अल्लाह तआला ने क़ुरआन शरीफ़ में फ़रमाया है :

“जो लोग (सच्चे दिल से) ईमान लाए और (फिर) भले काम किए अल्लाह तआला लोगों के दिलों में उनकी मुहब्बत भर देगा।”

हज़रत अब्दुल्लाह रह० की मुबारक जिंदगी इस आयत की सच्ची तसवीर थी। हक़ीक़त यह है कि अगर आदमी सच्चे दिल से ईमान लाकर भले कामों से अपनी ज़िंदगी संवार ले तो वाक़ई इस लायक है कि दोनों जहांन में उसकी कद्र हो। हज़रत की जिंदगी के हालात जब हम पड़ते हैं तो मालूम होता है कि वह ईमान और अमले सालेह की जीती-जागती तसवीर थे। नेकी और भलाई का नमूना थे। इस्लाम का एक निशान थे कि हमेशा के लिए लोग उनसे रहनुमाई हासिल करें। यूं तो आपकी जिंदगी सर-ता-पैर भलाई और नेकी ही थी लेकिन चन्द खूबियां ऐसी उभरी हुई थीं कि हजरत का नाम सुनते ही उन खूबियों की तसवीर आंखों में फिर जाती है–

Logo के साथ किस तरह रहे ता कि वो आप से jud कर रहे?

  • मख़्लूक़  के साथ अच्छा सुलूक

किसी शख्स की नेकी और दीनदारी का सही अंदाजा इस बात से होता है कि लोगों के साथ उसका सुलूक कैसा है? हज़रत अब्दुल्लाह रह० हर एक के काम आते और अपने पराए का ख़्याल किए बगैर हर एक के साथ अच्छा सुलूक करते। वह गैरों पर अपनी दौलत इस तरह लुटाते कि कोई अपनों पर भी क्या लुटाएगा।

हज के लिए तो हर साल जाते ही थे, बहुत-से लोग आपके साथ हो लेते। सफ़र पर जाते हुए आप सिर्फ अपने ही खाने का इंतिज़ाम न करते, बल्कि अपने साथियों के लिए भी खाने-पीने का इंतिज़ाम करके चलते एक साल तो लोगों ने यह देखा कि उनके साथ दो ऊंटों पर सिर्फ़ भुनी हुई मुर्गियां लदी हुई थीं। हज को रवाना होने से पहले अपने तमाम साथियों से कहते कि अपनी-अपनी रक़में मेरे पास जमा करो। सबसे रक्कम लेकर अलग-अलग यों में रख लेते और हर थैली पर देनेवाले का नाम और रकम की मिकदार । फिर रास्ते भर अपने पास से खर्च करते। अच्छे से अच्छा खिलाते, लोगों के आराम का ख्याल रखते और हर तरह की सहूलत पहुंचाने की कोशिश करते। हज से फ़ारिग होकर मदीना पहुंचते तो साथियों से कहते, “अपने घरवालों के लिए ज़रूरत की जो चीजें लेना चाही ले लो।” लोग इत्मीनान के साथ अपनी ज़रूरत की चीजें खरीद लेते हज से वापस आकर अपने सारे साथियों की दावत करते और फिर हर एक को उसकी थैली रकम के समेत वापस कर देते।

एक बार लोगों ने पूछा कि रास्ते में तो आप बताते नहीं कि अपने पास से ख़र्च कर रहे हैं। फ़रमाया : अगर पहले से लोगों को बता दूं कि अपने पास से ख़र्च कर रहा हूं तो कौन आसानी से तैयार होगा कि रास्ते भर मेरे माल से खाए और घरवालों के लिए ज़रूरत का सामान ख़रीदे । इस बहाने मुझे मौक़ा मिल जाता है कि मैं अपना माल उन लोगों पर खर्च करने की सआदत पाता हूं जो अल्लाह के घर की ज़ियारत के लिए अपने घरों से निकलते हैं। 

खाना हमेशा मेहमान के साथ खाते और हमेशा उनके दस्तरखान पर कोई न कोई मेहमान ज़रूर होता। फ़रमाते कि मेहमान के साथ जो खाना खाया जाता है उसका हिसाब नहीं होता। पैसे से भी हर एक की मदद करते। ‘जहां किसी के बारे में मालूम होता कि मक्ररूज़ है और कर्ज मांगनेवाला उसको परेशान कर रहा है तो बेचेन हो जाते, और जिस तरह बन पड़ता उसको क़र्ज़ के भारी बोझ से छुटकारा दिलाते।

शाम के सफ़र पर अक्सर जाया करते थे। रास्ते में रिक्क़ा के मक़ाम पर एक सराए पड़ती थी, हमेशा वहां ठहरते सराय में एक नौजवान आदमी था, वह जी जान से आपकी खिदमत करता और आपसे प्यारे रसूल सल्ल० की हदीसें बड़े शौक़ से सीखता । आप भी बड़ी मुहब्बत से उसको सिखाते और खुश होते।

एक बार ऐसा हुआ कि आप सराय में पहुंचे तो वह नौजवान नज़र नहीं आया। आपको फ़िक्र हुई, पूछा तो मालूम हुआ कि वह गिरफ़्तार हो गया है। आपको बहुत सदमा हुआ। वजह मालूम की तो लोगों ने बताया कि उस पर एक आदमी का क़र्ज़ा था। क़र्ज़ा बहुत ज़्यादा था। क़र्ज़वाला तक्राज्ञे करता और उसके पास देने के लिए कुछ था ही नहीं। इसलिए उस आदमी ने उसको पकड़वा दिया। आप तलाश करते-करते उस शख्स के पास पहुंचे, जिसका क़र्ज़ा था। उससे तहाई में फ़रमाया तुम्हारा कितना कर्ज है? तुम क़र्जे की सारी रक्कम मुझसे ले लो और उस नौजवान को रिहा करवा दो, और उससे क्रसम ले ली कि किसी को यह बात बताए नहीं वह शख्स खुशी-खुशी राजी हो गया।

आपने उसको रकम दी और उसी वक्त वहां से रवाना हो गए। जब वह नौजवान छूटकर सराय में आया तो उसे मालूम हुआ कि हज़रत अब्दुल्लाह रह० आए थे और उसे पूछ रहे थे। नौजवान को न मिलने का बहुत अफ़सोस हुआ तलाश करता-करता कई दिन के सफर के बाद हज़रत की ख़िदमत में पहुंचा। हज़रत बहुत खुश हुए और हालात मालूम किए नौजवान ने अपनी सारी आप बीती सुनाई, और यह भी बताया कि सराय में ख़ुदा का कोई नेक बन्दा आया था उसने चुपके से मेरी तरफ़ से रक्कम अदा कर दी और में छूट गया। मालूम नहीं कौन था? मेरे दिल से हर वक्त उसके लिए दुआएं निकलती हैं हज़रत ने फ़रमाया, ख़ुदा का शुक्र है कि तुमने मुसीबत से नजात पाई। जब हज़रत का इंतक़ाल हुआ तो उस शख्स को यह राज़ लोगों ने

बताया कि वह रकम अदा करनेवाले हज़रत अब्दुल्लाह रह० थे।

एक आदमी पर सात सौ दिरहम का क़र्ज़ा था। बेचारा बहुत परेशान था लोगों ने हज़रत से जिक्र किया। आपने उसी वक़्त अपने मैनेजर को रुक्कआ लिखा कि उस शख्स को सात हज़ार दिरहम दे दो। रुक्रआ लेकर वह शख्स मैनेजर के पास पहुंचा और ज़बानी भी मैनेजर को बताया कि मुझ पर सात सौ का क़र्ज़ा है। मैनेजर ने कहा, आप ज़रा ठहरिए, उसमें रकम कुछ ज्यादा लिखी गई है। मैं जरा मालूम करा लूं हज़रत को पर्चा लिखकर भेजा कि उस शख्स को सात सौ की ज़रूरत है और आपने भूले से सात हज़ार लिख दिए हैं। हज़रत ने जवाब में लिखा कि फ़ौरन उस शख़्स को चीदर हज़ार दे दो मैनेजर ने हज़रत की ख़ैर ख़्वाही में फिर पर्चा लिख भेजा कि आप अगर इस तरह दौलत लुटाते रहे तो कुछ ही दिनों में यह सारा ख़ज़ाना ख़त्म हो जाएगा।

हजरत को इस बात पर रंज हुआ और लिख भेजा कि दुनिया की दौलत लुटाकर आख़िरत की दौलत समेटने की फिक्र में हूँ। क्या तुम्हें प्यारे रसूल सल्ल० का यह क़ौल याद नहीं कि अगर कोई आदमी अपने मुसलमान भाई को किसी ऐसी बात से अचानक खुश कर दे जिसकी उसे उम्मीद न हो तो अल्लाह तआला उसको बख़्श देगा। बताओ क्या चौदह हज़ार में यह सौदा टोटे का है?

• हज़रत ने दूसरी मर्तबा सात हज़ार के बजाए चौदह हज़ार इसलिए लिखे थे कि सात हज़ार की रक्कम तो उसे मालूम हो गई थी। अगर उसे सात हज़ार देते तो उसकी उम्मीद तो उसे थी ही। इसलिए आपने चौदह हज़ार का हुक्म दिया कि उम्मीद के ख़िलाफ़ अचानक इतनी बड़ी रक़म देखकर वह इंतिहाई ख़ुश होगा ।

Gareebo के बीच कैसर रहे ?

  • आजिज़ी और तवाज़ो

हज़रत अब्दुल्लाह रह० की शान एक तरफ तो यह थी कि बड़े-बड़े हाकिमों को भी मुंह न लगाते थे और दूसरी तरफ़ हाल यह था कि हर वक़्त लोगों की ख़िदमत में लगे रहते। लोगों की ज़रूरतें पूरी करते, हर एक से खाकसारी और तवाज़ो से पेश आते कभी अपनी बड़ाई का इजहार न करते। फ़रमाया करते कि शोहरत से हमेशा बचते रहो गुमनामी में भलाई है लेकिन किसी पर यह भी न ज़ाहिर होने दो कि तुम गुमनामी को पसन्द करते हो, उससे भी गुरूर पैदा हो सकता है ।

* मर्व में आपका एक बहुत बड़ा मकान था। हर वक़्त अकीदतमंदों और शागिदों की भीड़ रहती थीं। कुछ दिनों तो आपने बरदाश्त किया। लेकिन जब देखा रोज बरोज़ ज़्यादती ही हो रही है तो कूफ़ा चले गए और वहां एक छोटी-सी अंधेरी कोठरी में रहने लगे। लोगों ने हमदर्दी करते हुए कहा कि हज़रत यहां इस अंधेरी कोठरी में तो आपकी तबीयत घबराती होगी? थोड़ी देर ख़ामोश रहे, फिर फ़रमाया : लोग अक़ीदतमंदों के हुजूम में रहना पसन्द करते हैं और मैं उससे भागता हूँ, इसी लिए तो मर्व से कूफ़ा भाग कर आया हूँ।

एक मर्तबा किसी सबील पर पानी पीने के लिए पहुंचे। वहां भीड़ थी। लोगों का रेला आया तो दूर जा गिरे। वापसी में अपने साथी हज़रत हसन रह० से कहने लगे, जिंदगी ऐसी ही हो कि न लोग हमें पहचानें और न हमें कोई बड़ी चीज़ समझें

एक बार लोगों ने उनसे पूछा, हज़रत तवाज़ो किसे कहते हैं? फ़रमाया, साजो यह है कि तुम्हारी खुद्दारी तुम्हें भालदारों से दूर रखे।

  • Deen की दावत कियो जरूरी है ? | Hazrat Abbu Bakar के इस्लाम लेन के बाद Dawat~e~Tabligh

    Deen की दावत कियो जरूरी है ? | Hazrat Abbu Bakar के इस्लाम लेन के बाद Dawat~e~Tabligh

  • Duniya की जिंदगी खेल-तमाशे हैं  | 5 चीज़ों में जल्दबाज़ी जाइज़ है – Dawat~e~Tabligh

    Duniya की जिंदगी खेल-तमाशे हैं | 5 चीज़ों में जल्दबाज़ी जाइज़ है – Dawat~e~Tabligh

  • Boss के gusse से बचने का wazifa | जालिम को कैसे हराए ? Dawat~e~Tabligh

    Boss के gusse से बचने का wazifa | जालिम को कैसे हराए ? Dawat~e~Tabligh

Leave a Comment

जलने वालों से कैसे बचे ? Dil naram karne ka wazifa अपने खिलाफ में Bolne वालों से बचने का nuskha Boss के gusse से बचने का wazifa Dusman से हिफाजत और ausko हराने का nuskha