इन्सानों का कब्रों से निकलना Maidan-e-Hashr| काफिरों की आंखें कैसे होंगी? | Dawat-e-Tabligh

“और हम उनको क़ियामत के दिन अंधे, बहरे, गूंगे करके चेहरों के बल चलाएंगे,’ कब्रों से बे-ख़त्ना के निकलेंगे। आपस में कहते होंगे कि दुनिया में बस तुम दस दिन रहे।’….

इन्सानों का कब्रों से निकलना Maidan-e-Hashr| काफिरों की आंखें कैसे होंगी? | Dawat-e-Tabligh

 इन्सानों का कब्रों से निकलना

हज़रत अब्दुल्ला बिन उमर  रिवायत फ़रमाते हैं कि प्यारे नबी ने इरशाद फरमाया कि सबसे पहले ज़मीन फटकर मुझे ज़ाहिर करेगी; फिर अबू बक्र  व हज़रत उमर क़ब्रों से जाहिर होंगे। फिर बकी (कब्रिस्तान) में जाऊंगा। इसलिए वे (क़ब्रों से निकल कर ) मेरे साथ जमा कर दिए जाएंगे। फिर मैं मक्का वालों का इन्तिज़ार करूंगा, (यहां तक कि वे भी क़ब्रों से निकल कर मेरे साथ हो जाएंगे) फिर मैं हरमैन (वालों) के दर्मियान (महशर में) जमा हो जाऊंगा।

जिन्को kabar में दफ़न ना किया हो उनका क्या होगा ?

जो लोग क़ब्रों में दफ़न हैं (मुस्लिम हों या काफ़िर) वे तो दूसरी बार सूर की आवाज़ सुनकर क़ब्रों से निकल खड़े होंगे और जो लोग आग में जला दिये गये या समुद्रों में बहा दिए गये या जिनको दरिंदों ने फाड़ खाया था, उनकी रूहों को भी जिस्म दिया जाएगा और ज़रूर ही वे भी महशर में हाज़िर होंगे। 


क्या लोग भटके हुए हैं?

1. आसमान, ज़मीन, चांद, सूरज और सितारों के बारे में पुराने फलसफे और आज की साइंस के कुछ ख्यालात है। ये सब उन लोगों ने खुद तज्वीज़ कर लिए हैं, जिनमें तब्दीलियां तज्वीज़ करते रहते हैं। आज एक नज़रिया हैं, कल दूसरी बात कह देंगे। अटकलों, ख्यालों और गुमानों के चारों तरफ इनके नज़रएि घूमते रहते हैं। फिर ताज्जुब यह है कि कुरआन व हदीस में इन चीज़ों के पिछले या अगले जो हालात ज़िक्र किये गये हैं, उनके मान लेने में इसलिए झिझकते हैं कि अपने गढ़े हुए नज़रियों के खिलाफ नज़र आते हैं, जिसने इन चीज़ों को वुजूद बख़्शा है। उससे ज़्यादा उसकी मखलूक्क़ का जानने वाला कौन हो सकता है? बेशक वे लोग बड़े बे-सूझ-बूझ के और हक के रास्ते से हटे हुए हैं। अल्लाह जो सबको पैदा करने वाला और सबका मालिक है, उसकी ख़बर को अपने तज्वीज़ किए हुए नज़रियों पर परखते हैं। क़ियामत आने के सिलसिले में दुनिया के बिगड़ने और बदलने के जिन हालात का ज़िक्र कुरआन व हदीस में किया गया है, बेशुव्हा सही और हक है। जो लोग अपने तज्वीज़ किए हुए नज़रिए की बुनियाद पर क़ुरआन व हदीस को न मानें, खुली गुमराही और खुली नादानी में पड़े हुए हैं। इंय्यत्तबिऊ न इल्लज़्ज़ुन्न न वमा तहवल अन्फुसु लकुद जा अहुम बिर्रब्बिहिमुलहुदा । 

2. तिर्मिज़ी शरीफ

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इन्सान कब्रों से kaise niklege? 

कब्रों से नंगे और बे-ख़त्ना के निकलेंगे

हज़रत आइशा रज़ियल्लाहु अन्हा ने फरमाया कि मैंने प्यारे नबी 1498 से सुना कि कियामत के दिन लोग नंगे पांव, नंगे बदन, बे-ख़त्ना के जमा किए जाएंगे। मैंने अर्ज़ किया या रसूलुल्लाह ! क्या मर्द व औरत सब (नंगे होंगे और) एक दूसरे को देखते होंगे। (अगर ऐसा हुआ तो बड़े शर्म की बात होगी) इसके जवाब में प्यारे नबी ने फरमाया कि ऐ आइशा ! कियामत की सख्ती इतनी ज़्यादा होगी (और लोग घबराहट और परेशानी से ऐसे बेहाल होंगे) कि किसी को दूसरे की तरफ देखने का ध्यान ही न होगा।’

दूसरी हदीस में है कि प्यारे नबी ने इर्शाद फरमाया कि बेशक कियामत के दिन नंगे पांव, नंगे बदन, बे-ख़त्ना जमा किये जाओगे। यह फरमाकर क़ुरआन मजीद की आयत ‘क मा बदना अव्वल ख़ल्किन इदुह’ (हमने जिस तरह पहली बार पैदा करने के वक्त शुरूआत की थी, उसको दोबारा इसी तरह लौटाएंगे) तिलावत फ़रमाई। फिर फरमाया कि सबसे पहले कियामत के दिन इब्राहीम को कपड़े पहनाये जाएंगे।

उलमा ने लिखा है कि हज़रत इब्राहीम को इसलिए सबसे पहले लिबास पहनाया जाएगा कि उन्होंने सबसे पहले फकीरों को कपड़े पहनाये थे या इसलिए कि वे अल्लाह तआला की तरफ दावत देने की वजह से सबसे पहले नंगे किये गये जबकि काफ़िरों ने उनको आग में डाला था।

हज़रत अब्दुल्लाह बिन मस्ऊद से रिवायत है आहज़रत ने इर्शाद फ़रमाया कि सबसे पहले जिसको कपड़े पहनाये जाएंगे, वह इब्राहीम होंगे। अल्लाह तआला फ़रमायेंगे कि मेरे दोस्त को पहनाओ। चुनांचे जन्नत के कपड़ों में से दो बारीक और नर्म-सफेद कपड़े उनको पहनाने के लिए लाए जाएंगे। उनके बाद मुझे कपड़े पहनाये जाएंगे।

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1. बुखारी व मुस्लिम शरीफ

2. मिश्कात शरीफ

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कब्रों से उठकर मैदाने हश्र tak kaise jyenge? 

कब्रों से उठकर मैदाने हश्र में जमा होने के लिए चलना

हज़रत अबू हुरैरः से रिवायत है कि आहज़रत ने फरमाया कि कियामत के दिन लोग तीन किस्म से जमा किये जाएंगे (1) एक जमाअत पैदल, (2) दूसरा सवार और (3) तीसरी वह जमाअत होगी जो अपने चेहरों के बल चलेंगे। सवाल किया गया कि या रसूलल्लह ! वे लोग चेहरों के बल क्यों कर चलेंगे? जवाब में सैयदे आलम 58 ने इर्शाद फरमाया कि बेशक जिस जात पाक ने उनको क़दमों पर चलाया, वह इसपर कुदरत रखता है कि उनको चेहरों के बल चला दें। फिर फ़रमाया कि ख़बरदार वे (चेहरों के बल इस तरह चलेंगे) कि ज़मीन के उभरे हुए हिस्से और कांटों तक से अपने चेहरों के ज़रिए बचाव करेंगे।’

यह हाल काफिरों का होगा। चूंकि इन नालायकों ने दुनिया में अपने चेहरे को ख़ुदा के हुजूर में रखने से मुंह फेरा और घमंड की वजह से सज्दे में सर रखने से इन्कार कर दिया इसलिए कियामत के दिन उनके चेहरों से उनको पांव का काम दिलाया जाएगा ताकि खूब जलील हों और चेहरों के पैदा करने वाले और मालिक को सज्दा करने से जो इन्कार किया था, उसका मज़ा चख लें। अल्लाह तआला को सब कुछ कुदरत है। वह अपनी मख़्लूक के जिस्म के हर हिस्से को उसकी हर ख़िदमत में इस्तेमाल फ़रमा सकते हैं। दुनिया ही में देख लिया जाए कि कुछ चीजें चार पैरों पर और कुछ दो पैरों पर चलती हैं और कुछ सिर्फ अपने पेट से (फ मिन्हुम मैंयम्शी अला बलिहा ) वे लोग जिनके एक हाथ है, वे उसी एक हाथ से दोनों हाथों का काम कर लेते हैं। जो लोग अंधे होते हैं उनकी सुनने और महसूस करने की ताकत अकसर तेज़ होती है, जिनसे बड़ी हद तक आंख न होने की कमी हो जाती है। कियामत के दिन अल्लाह तआला काफिरों को चेहरे के बल चलायेंगे। यह अक्ल के एतबार से ज़रा भी नामुम्किन नहीं है।

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1. बुखारी व मुस्लिम 

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काफिर गूंगे-बहरे और अन्धे उठाये जाएंगे

सूरः बनी इस्राईल में फरमाया:

व नहशुरुहुम यौमल कियामति अला वुजूहिहिम उम्यौं व
बुक्मों व सुम्मा |

“और हम उनको क़ियामत के दिन अंधे, बहरे, गूंगे करके चेहरों के बल चलाएंगे।’

सूरः ताहा में इर्शाद फ़रमाया :

व मन अअर ज़ अन ज़िक्री फ् इन्न न लहू मईीशतन ज़न्कौंव नहशुरुहू यौमल कियामति अञ्ज्मा । का ल रब्बि लिम हशर्तनी अञ्ज्मा व कुद कुन्तु बसीरा । का ल क्ज़ालि क अतत् क आयातुना फु न सी त हा व कज़ालि कल यौ म तुन्सा । व कज़ालि क नज्जी मन असर फ व लम् युमिम बिआयाति रब्बिही व ल अज़ाबुल आख़िरति अशदु व अबका ।

‘और जिसने मुंह फेरा मेरी याद से तो उसके लिए है तंगी की जिंदगी और क़ियामत के दिन हम उसका हश्र इस तरह करेंगे कि वह अंधा होगा। वह कहेगा कि ऐ मेरे रब क्यों तूने मुझे अंधा उठाया हालांकि मैं देखता था जवाब में ख़ुदा इर्शाद फ़रमायेगा इसी तरह आती थीं तेरे पास मेरी आयतें, पस तूने उनको भुला दिया और इसी तरह आज तू भुलाया जाएगा और इसी तरह हम बदला देंगे उसको जो हद से बढ़ा और अपने रब की आयतों पर ईमान न लाया और अलबत्ता आखिरत का अज़ाब सख्त है और बाकी रहने वाला है।

अल्लाह के दीन से दुनिया में जिन लोगों ने आँखें फेरी और सच्चे मालिक की आयतों को सुनकर कुबूल करने और इक़रार करने के बजाए सब सुनी अनसुनी कर दी, उनकी आंखों और कानों और जुबानों की ताकतें छीन ली जाएंगी और गूंगे-बहरे होकर उठेंगे। यह हश्र के शुरू का ज़िक्र है । फिर आंख और ज़ुबान और कान खोल दिए जाएंगे ताकि महशर के हालात और उसकी सख्तियां देख सकें और हिसाब-किताब के मौके पर उनसे सवाल-जवाब किया जाए।’

काफिरों की आंखें कैसे होंगी?

काफिरों की आंखें नीली होंगी।

सूरः ताहा में फ़रमाया :

व शुरुल मुजिमी न यौ म इज़िन जुकैंय त खाफतू न
बै नहुम इल्लबस्तुम इल्ला अश्रा ।

‘और हम जमा करेंगे उस दिन गुनाहगारों को इस हाल में कि उनकी आंखें नीली होंगी। चुपके-चुपके आपस में कहते होंगे कि दुनिया में बस तुम दस दिन रहे।’

यानी बुरा लगने के लिए उनकी आखें नीली कर दी जाएंगी, जब क़ियामत को उठ खड़े होंगे तो आपस में धीरे-धीरे बातें करेंगे कि दुनिया में कितने दिन रहे। फिर खुद ही आपस में जवाब देंगे। कोई कहेगा कि दुनिया में हम दस दिन ही रहे।

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