जब Bade हुए तो क्या Sacchai देखा Kavita in Hindi | Dawat~e~Tabligh

इल्म की नुमाइश करनेवालों को, जाहिलों की मज्लिस सजाते देखा । हसद व कीना में जलनेवालों को, रोज़ी की तंगदस्ती में देखा। सब्र व शुक्र करने वालों को, दुनिया में बावकार देखा। Web Stories जब Bade हुए तो क्या Sacchai देखा Kavita in Hindi | Dawat~e~Tabligh…

जब Bade हुए तो क्या Sacchai देखा Kavita in Hindi | Dawat~e~Tabligh
जब Bade हुए तो क्या Sacchai देखा Kavita in Hindi | Dawat~e~Tabligh

जब Bade हुए तो क्या Sacchai देखा Kavita in Hindi

दौलत की नुमाइश करनेवालों को ,

मुफ़्लिसी की आगोश में देखा।

इल्म की नुमाइश करनेवालों को,

जाहिलों की मज्लिस सजाते देखा ।

ताक़त की नुमाइश करनेवालों को,

कमज़ोरों की गुलामी करते देखा।

इबादत की नुमाइश करनेवालों को,

दीन से मुंह मोड़ते देखा।

सख़ावत की नुमाइश करनेवालों को,

सदक़ात की रोटी पर पलते देखा ।

लोगों के रहम पर पलने वालों को,

हमेशा मुफ़्लिस और मोहताजी में देखा।

दीन से दुनिया कमाने वालों को,

चेहरे से रौनक़ उड़ते देखा ।

सब्र व शुक्र करने वालों को,

दुनिया में बावकार देखा।

हसद व कीना में जलनेवालों को,

रोज़ी की तंगदस्ती में देखा।

झूठ बोलनेवालों को,

ईमान से दूर होते देखा।

गुस्से में रहने वालों को,

अक्ल की महरूमी में देखा।

लोगों से उम्मीदें रखनेवालों को,

नाउम्मीद और परेशान देखा।

लोगों से सवाल करनेवालों को,

बेइज़्ज़ती के आलम में देखा।

सच्ची तौबा करनेवालों को,

इबादतं में लजत लेते देखा।

गुनाहों में जीनेवालों को,

परेशानी के दलदल में धंसते देखा।

बन्दों के हुकूक झुठलानेवालों को,

अपने हक़ पर रोते देखा ।

नाजाइज़ कमाई पर पलनेवालों को,

मुसीबतों के जाल में फंसते देखा।

वालिदैन के फरमांबरदारों को,

तरक़्क़ी की मंजिल छूते देखा।

मां-बाप के नाफ़रमानों को,

औलाद के जुल्म व सितम सहते देखा।

जुल्म व सिनम करने वालों को,

मज़लूम की खुशामद करते देखा।

अल्लाह के हुक़ूक़ अदा करनेवालों को,

अपने ही साये से डरते देखा।

बन्दों के हुक़ूक़ अदा करनेवालों को,

दुनिया में शोहरत पाते देखा ।

उस्ताद की ख़िदमत करनेवालों को,

ख़िदमत – गुज़ारों के साए में देखाबेहोशी में जीनेवालों ने

जब होश में आए तो क्या-क्या देखा।

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