क्या मरने(मृत्यु) के बाद Jannat\ jahannam(Hell) में जाना है?| Prophet Mohammad  कि आखिरी बात| Dawat-e-Tabligh

क्या मरने(मृत्यु) के बाद Jannat\ jahannam(Hell) में जाना है?| Prophet Mohammad  कि आखिरी बात| Dawat-e-Tabligh
क्या मरने(मृत्यु) के बाद Jannat\ jahannam(Hell) में जाना है?| Prophet Mohammad  कि आखिरी बात| Dawat-e-Tabligh

मनुष्य की एक और कमज़ोरी

मनुष्य की यह कमज़ोरी रही है कि वह अपने बाप दादा और बुजुर्गों की ग़लत बातों को भी आंख बन्द करके मानता चला जाता हे, चाहे बुद्धि और तर्क उन बातों का साथ नहीं दे रहे हों, लेकिन इसके बावजूद मनुष्य पारिवारिक बातों पर जमा रहता है और इसके विरुद्ध अमल तो क्या, कुछ सुनना भी पसन्द नहीं करता।

Prophet Mohammad की तकलीफ

यही कारण था कि 40 साल की आयु तक मुहम्मद (सल्ल.) का सम्मान करने और सच्चा मानने और जानने के बावजूद मक्का के लोग अल्लाह के सन्देष्टा के रूप में अल्लाह की ओर से लायी गयी आपकी शिक्षाओं के दुश्मन हो गए। आप जितना अधिक लोगों को सबसे बड़ी सच्चाई शिर्क के विरुद्ध एकेश्वरवाद की ओर बुलाते, लोग उतना ही आप के साथ दुश्मनी करते। कुछ लोग इस सच्चाई को मानने वालों और आपका साथ देने वालों को सताते, मारते और दहकते हुए आग के अंगारों पर लिटा देते। गले में फंदा डाल कर घसीटते, उनको पत्थरों और कोड़ों से मारते, लेकिन आप सबके लिए अल्लाह से दुआ मांगते, किसी से बदला नहीं लेते, सारी सारी रात अपने मालिक से उनके लिए सीधे मार्ग पर आने की दुआ करते। एक बार आप मक्का के लोगों से निराश होकर निकट के शहर ताइफ गए। वहां के लोगों ने इस महान मनुष्य का घोर अपमान किया। आपके पीछे शरारती लड़के लगा दिए जो आपको बुरा भला कहते।

उन्होंने आपको पत्थर मारे, जिससे आपके पांव से खून बहने लगा। कष्ट व तकलीफ के कारण जब आप कहीं बैठ जाते तो वे लड़के आपको दोबारा खड़ा कर देते और फिर मारते। इस हाल में आप शहर से बाहर निकल कर एक जगह बैठ गए। आपने उनको बददुआ नहीं दी बल्कि अपने मालिक से प्रार्थना की कि “ऐ मालिक! इनको समझ दे, ये जानते नहीं।”

इस पवित्र ईशवाणी और वह्य पहुंचाने के कारण आपका और आपका साथ देने वाले परिवार और कबीले का तीन वर्ष तक पूर्ण सामाजिक बहिष्कार किया गया। इस पर भी बस न चला तो आपके कत्ल की योजना बनायी गयी। अन्त में अल्लाह के आदेश से आपको अपना प्यारा शहर मक्का छोड़ कर दूसरे शहर मदीना जाना पड़ा। वहां भी मक्का वाले सेना तैयार करके बार बार आप से युद्ध करने के लिए धावा बोलते रहे।

Prophet Mohammad  कि आखिरी बात

अपनी मृत्यु से कुछ ही महीने पहले आपने लगभग सवा लाख लोगों के साथ हज किया और तमाम लोगों को अपनी अन्तिम वसीयत की जिसमें आपने यह भी कहा “लोगो ! मरने के बाद कयामत में हिसाब किताब के दिन मेरे बारे में भी तुम से पूछा जाएगा कि क्या मैंने अल्लाह का संदेश और उसका दीन तुम तक पहुंचाया था तो तुम क्या जवाब दोगे?” सबने कहा- “निःसंदेह आपने इसे पूर्ण रूप से हम तक पहुंचा दिया, उसका हक अदा कर दिया।” आपने आसमान की ओर उंगली उठायी और तीन बार कहा- “ऐ अल्लाह ! आप गवाह रहिए, आप गवाह रहिए, आप गवाह रहिए।” इसके बाद आपने लोगों से फरमाया- “यह सच्चा दीन जिन तक पहुंच चुका है वे उनको पहुंचाएं जिनके पास नहीं पहुंचा है।”

आपने यह भी ख़बर दी कि मैं अन्तिम रसूल हूं। अब मेरे बाद कोई रसूल या नयी नहीं आएगा में ही वह अन्तिम सन्देष्टा हूं। जिसकी तुम प्रतीक्षा कर रहे थे और जिसके बारे में तुम सब कुछ जानते हो।

कुरआन में है-

“जिन लोगों को हमने किताब दी है, वे इस (पैग़म्बर मुहम्मद) को ऐसे पहचानते हैं जैसे अपने बेटों को पहचानते हैं। यद्यपि उनमें का एक गिरोह सत्य को जानते बूझते छुपाता है (अनुवाद कुरआन, बकुरा 2:46)

हर मनुष्य का दायित्व क्या है?

अब कयामत तक आने वाले हर मनुष्य पर यह अनिवार्य है। और उसका यह धार्मिक और मानवीय कर्तव्य है कि वह उस अकेले मालिक की उपासना करे, उसी का आज्ञा पालन करे, उसके साथ किसी को साझी न ठहराए कयामत और दोबारा उठाए जाने, हिसाब किताब, जन्नत व जहन्नम को सच माने और इस बात को माने कि परलोक में अल्लाह मालिक होगा। वहां भी उसका कोई साझी न होगा और उसके अन्तिम दूत मुहम्मद (सल्ल.) को सच्चा जाने और उनके लाए हुए दीन और जीवन यापन के तौर तरीकों पर चले इस्लाम में इसी चीज़ को ईमान कहा गया है। इसको माने बिना मरने के बाद कयामत में सदैव के लिए नरक की आग में जलना पड़ेगा।

क्या मरने के बाद Jannat\ jahannam(Hell) में जाना है?

यहां किसी के मन में कुछ सवाल पैदा हो सकते हैं। मरने के बाद जन्नत या जहन्नम में जाना दिखाई तो देता नहीं, इसे क्यों मानें? इस संबंध में यह जान लेना उचित होगा कि समस्त ईश्वरीय किताबों में जन्नत और जहन्नम का हाल बयान किया गया है, जिस से यह मालूम होता है कि जन्नत व जहन्नम की धारणा सारे इश्वरीय धर्मों में एक ठोस हकीकत है।

इसे हम एक उदाहरण से भी समझ सकते हैं। बच्चा जब मां के पेट में होता है यदि उससे कहा जाए कि जब तुम बाहर आओगे तो दूध पिओगे और बाहर आकर तुम बहुत से लागों और बहुत सी वस्तुओं को देखोगे तो गर्भ की हालत में उसे विश्वास नहीं आएगा मगर जैसे ही वह गर्भ से बाहर आएगा तब सारी वस्तुओं को अपने सामने पाएगा। इसी तरह यह सारा संसार एक गर्भ की हालत में है । यहां से मौत के बाद निकल कर जब मनुष्य परलोक में आंखें खोलेगा तो सब कुछ अपने सामने पाएगा।

वहां की जन्नत व जहन्नम और दूसरे तथ्यों की सूचना हमें उस सच्चे व्यक्ति ने दी, जिसको उसके घोर शत्रु भी दिल से झूठा न कह सके और कुरआन जैसी किताब ने दी है, जिसकी सच्चाई हर अपने पराए ने मानी है।

Islam स्वीकार करना क्यों ज़रूरी है?

दूसरी चीज़ जो किसी के मन में खटक सकती है, वह यह है कि जब सारे रसूल, उनका लाया हुआ दीन और ईश्वरीय किताबें सच्ची हैं तो फिर इस्लाम स्वीकार करना क्यों ज़रूरी है? आज की वर्तमान दुनिया में इसका जवाब बिल्कुल आसान है। हमारे देश की एक संसद है यहां का एक संविधान है। यहां जितने प्रधानमंत्री हुए हैं, वे सब हिन्दुस्तान के वास्तविक प्रधानमंत्री थे। पंडित जवाहर लाल नेहरू, शास्त्री जी, इन्दिरा गांधी, चरण सिंह, राजीव गांधी वी. पी. सिंह आदि । देश की ज़रूरत और समय के अनुसार जो वैधानिक संशोधन और कानून इन्होंने पास किए, वे सब भारत के संविधान और कानून का हिस्सा हैं। इसके बावजूद अब जो वर्तमान प्रधानमंत्री हैं, उनकी कैबिनेट और सरकार संविधान या कानून में जो भी संशोधन करेगी, उससे पुरानी संवैधानिक धाराएं और कानून समाप्त हो जाएगा और भारत के हर नागरिक के लिए आवश्यक होगा कि इस नए संशोधित संविधान और कानून को माने।

इसके बाद कोई भारतीय नागरिक यह कहे कि इन्दिरा गांधी असली प्रधानमंत्री थीं, मैं तो उन्हीं के समय के संविधान और कानून को मानूंगा, इस नए प्रधानमंत्री के संशोधित हुए संविधान व कानून को मैं नहीं मानता और न उनके द्वारा लगाए गए टैक्स दूंगा तो ऐसे व्यक्ति को हर कोई देश द्रोही कहेगा और उसे दंड का हकदार समझा जाएगा। इसी तरह सारे ईश्वरीय धर्मों और ईश्वरीय किताबों में अपने समय में सत्य और सच्चाई की शिक्षा दी जाती थी लेकिन अब उन समस्त रसूलों और ईश्वरीय किताबों को सच्चा मानते हुए भी सबसे अन्तिम रसूल मुहम्मद (सल्ल.) पर ईमान लाना और उनकी लाई हुई अन्तिम पुस्तक व शरीअत पर चलना हर मनुष्य के लिए आवश्यक है।

Prophet Mohammad आखिरी नवि है?

यह सवाल भी मन मस्तिष्क में आ सकता है कि मुहम्मद (सल्ल.) अल्लाह के सच्चे नबी और दूत हैं और वे दुनिया के अन्तिम दूत हैं, इसका क्या सबूत है? है

जवाब साफ है कि एक तो यह कुरआन अल्लाह की वाणी है, उसने दुनिया को अपने सच्चे होने के लिए जो तर्क दिए हैं वे सबको मानने पड़े हैं और आज तक उनकी काट नहीं हो सकी। उसने मुहम्मद (सल्ल.) के सच्चे और अन्तिम नबी होने की घोषणा की है।

दूसरी बात यह है कि मुहम्मद (सल्ल.) के पवित्र जीवन का एक एक पल दुनिया के सामने है। उनका सम्पूर्ण जीवन इतिहास की खुली किताब है। दुनिया में किसी भी मनुष्य का जीवन आपके जीवन की भान्ति सुरक्षित और इतिहास की रोशनी में नहीं है। आपके दुश्मनों और इस्लाम दुश्मन इतिहासकारों ने भी कभी यह नहीं कहा कि मुहम्मद (सल्ल.) ने अपने व्यक्तिगत जीवन में कभी किसी बारे में झूठ बोला हो। आपके शहर वाले आपकी सच्चाई की गवाही देते थे। जिस आदर्श मनुष्य ने अपने व्यक्तिगत जीवन में कभी झूठ नहीं बोला, वह दीन के नाम पर ईश्वर के नाम पर झूठ कैसे बोल सकता है? आपनै स्वयं यह बताया कि मैं अन्तिम दूत (नबी) हूं। मेरे बाद अब कोई नबी नहीं आएगा। सारी धार्मिक पुस्तकों में अन्तिम ऋषि, कुल्कि अवतार की जो भविष्य वाणियां की गयीं और निशानियाँ बतायी गयी हैं, वे केवल मुहम्मद (सल्ल.) पर पूरी उतरती हैं।

Leave a Comment

Aurat aur mard ka akele hona | Shaitan की kya कोशिश है ? Dil कितने Prakar के होते हैं ?  Shaitan किस तरह लोगो को परेशान करता ha? Umar bin Khatab ki 6 नसीहतें औरतें तीन क़िस्म की होती हैं