क्या अच्छे काम लोगो को देखने के लिए करना ?| क्या लोगो को दीखाने के लिए पैसे kharch करना ?| Dawat-e-Tabligh

हर भले काम में मैंने आप की खुशी के लिए अपना माल ख़र्च किया। बन्दों को अच्छे आमाल (karam) का बदला देंगे । क्या अच्छे काम लोगो को देखने के लिए करना ?| क्या लोगो को दीखाने के लिए पैसे kharch करना ?| Dawat-e-Tabligh

क्या अच्छे काम लोगो को देखने के लिए करना ?| क्या लोगो को दीखाने के लिए पैसे kharch करना ?| Dawat-e-Tabligh
क्या अच्छे काम लोगो को देखने के लिए करना ?| क्या लोगो को दीखाने के लिए पैसे kharch करना ?| Dawat-e-Tabligh

लोगो ki nazar ma बहादुर बनने के लिए शहीद होना

हज़रत अबू हुरैरः से रिवायत है कि आंहज़रत सैयदे आलम ने फरमाया कि बेशक कियामत के दिन जिन लोगों के बारे में सबसे पहले फैसला दिया जाएगा। उनमें से एक शख्स वह होगा जो ( जिहाद में कत्ल हो जाने की वजह से ) शहीद समझ लिया गया था, उसको क़ियामत के दिन लाया जाएगा। इसके बाद अल्लाह तआला उसको नेमतों की पहचान कराएंगे जिनको वह पहचान लेगा (यानी उसे वे नेमतें याद आ जाएंगी जो अल्लाह ने दुनिया में उसको दी थीं) अल्लाह जल्ल ल शानुहू उस से सवाल फरमायेंगे कि तूने उन नेमतों को किस काम में लगाया? वह जवाब में अर्जु करेगा कि मैंने आपके रास्ते में यहां तक लड़ाई लड़ी कि शहीद हो गया। अल्लाह तआला फ़रमायेंगे कि तूने झूठ कहा (तेरा यह कहना गलत है कि तूने मेरे लिए लड़ाई लड़ी)। बल्कि तूने इसलिए लड़ाई की कि तुझे बहादुर समझा जाए सो (इसका फल तुझे मिल चुका और दुनिया में तेरा नाम हो चुका। इसके बाद हुक्म होगा कि इसे मुंह के बल खींचकर दोज़ख़ में डाल दिया जाए। चुनांचे हुक्म पूरा कर दिया जाएगा।

क्या लोगो को दीखाने के लिए इल्म/ Degree हासील करना ?

और एक आदमी उन लोगों में से भी होगा, जिसके बारे में सबसे पहले फैसला किया जाएगा जिसने इल्म (दीन) सीखा और सिखाया और क़ुरआन शरीफ पढ़ा। उसे (क़ियामत के दिन) लाया जाएगा। इसके बाद अल्लाह तआला उसको अपनी नेमतों की पहचान करायेंगे। चुनांचे वह पहचान लेगा। उससे अल्लाह तआला सवाल फरमायेंगे कि तूने इन नेमतों को किस तरह काम में लगाया? वह जवाब देगा कि मैंने इल्म हासिल किया और दूसरों को सिखाया और आपकी खुशी के लिए क़ुरआन पढ़ा। अल्लाह जल शाहू फरमायेंगे कि तूने झूठ बोला, मेरे लिए तूने न इल्म हासिल किया, न क़ुरआन पढ़ा) बल्कि तूने इल्म इसलिए पढ़ा कि लोग तेरे मुतअल्लिक यह कहें कि यह तो कुरआन पढ़ता रहता है (और इसका फल तुझे मिल चुका और) दुनिया में तेरे मुतअल्लिक वह कहा जा चुका जिसका तू चाहने वाला था। इसके बाद हुक्म होगा कि उसे मुंह के बल घसीट कर दोज़ख़ में डाल दिया जाए। चुनांचे हुक्म पूरा कर दिया जाएगा।

क्या लोगो को दीखाने के लिए पैसे kharch करना ?

और एक वह शख़्स भी उन लोगों में से होगा जिनके मुतअल्लिक् सबसे पहले फैसला किया जाएगा। जिसे अल्लाह तआला ने बहुत कुछ दिया था और तरह-तरह के माल उसे दिये गये थे। कियामत के दिन उसे लाया जाएगा। इसके बाद अल्लाह तआला अपनी नेमतों की पहचान करायेंगे। चुनांचे वह उनको पहचान लेगा। अल्लाह जल्ल ल शानुहू का सवाल होगा कि तूने इन नेमतों को किस चीज़ में लगाया? वह कहेगा कि कोई ऐसा भला काम जिसमें ख़र्च करना आप को महबूब हो, मैंने नहीं छोड़ा। हर भले काम में मैंने आप की खुशी के लिए अपना माल ख़र्च किया। अल्लाह जल्ल ल शाहू फरमायेंगे कि तूने झूठ बोला (मेरे लिए तूने ख़र्च नहीं किया) बल्कि तूने यह काम इसलिए किया कि तेरे बारे में यह कहा जाएगा कि वह सखी हैं, चुनांचे कहा जा चुका (और तेरा मक़सूद पूरा हो गया)। इसके बाद हुक्म होगा कि उसे मुंह के बल घसीटकर दोजख में डाल दिया जाए। चुनांचे इसे भी पूरा कर दिया जाएगा।                         

-मिश्कात

तिर्मिज़ी शरीफ में भी यह हदीस मौजूद है। इसमें यही जिक्र किया गया है कि इसके ब्यान करने का हज़रत अबू हुरैरः ने इरादा फ़रमाया तो (हश्र के मैदान के इस मंज़र के ख़्याल से) बेहोश हो गए। होश आने पर फिर ब्यान करने लगे तो दोबारा बेहोश हो गये। फिर होश आने पर तीसरी बार ब्यान करने का इरादा फ़रमाया तो तीसरी बार भी बेहोश हो गए और इसके बाद होश आने पर हदीस ब्यान फ़रमायी। जब यह हदीस हज़रत मुआविया को सुनायी गयी तो फ़रमाया कि जब इन तीनों आदमियों के साथ ऐसा होगा तो इनके अलावा दूसरे बदनीयत इन्सानों के बारे में अच्छा मामला होने की क्या उम्मीद रखी जाए। इसके बाद हज़रत अमीर मुआविया ॐ इतना रोये कि देखने वालों ने यह समझ लिया कि आज उनकी जान निकल कर रहेगी।

-मिश्कात अन अहमद

क्या अच्छे काम लोगो को दीखाने के लिए करना ?

 हज़रत अबू सईद बिन फुजाला से रिवायत है कि हमारे नबी फरमाया कि जब अल्लाह तआला कियामत के दिन लोगों को जमा करेंगे ने जिनके आने में ज़रा शक नहीं है तो एक पुकारने वाला ज़ोर से पुकारेगा कि जिसने कोई अमल अल्लाह के लिए किया और इस अमल में किसी दूसरे को दिखाने की नीयत करके इस दूसरे को भी शरीक कर लिया तो उसको चाहिए कि इस अमल का सवाब अल्लाह के सिवा (इस गैर से) ही ले ले।

– मिश्कात

दूसरी हदीस में है (जिसकी रिवायत बैहकी ने शोबुल ईमान में की है) कि जिस दिन अल्लाह तआला बन्दों को आमाल का बदला देंगे । दिखावा करने वालों से फ़रमायेंगे, जाओ दुनिया में तुम जिनको दिखाने के लिए अमल करते थे। उन्हीं के पास जाओ। फिर देखो कि उनके पास तुम्हें कुछ सवाब या भलाई मिलती है।           

-मिश्कात शरीफ

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