Kya कर्मों का फल मिलेगा?| बड़ी सच्चाई| Dawat-e-Tabligh

दुनिया में न किसी आँख ने देखा न किसी कान ने सुना न किसी दिल में उनका विचार आया।
जो लोग बुरे काम करेंगे..

Kya कर्मों का फल मिलेगा?| बड़ी सच्चाई
Kya कर्मों का फल मिलेगा?| बड़ी सच्चाई

Kya कर्मों का फल मिलेगा?| बड़ी सच्चाई| Dawat-e-Tabligh

मौत कि बड़ी सच्चाई

Allah ने अपनी सच्ची पुस्तक कुरआन में बहुत सी सच्चाई में से एक सच्चाई हमें यह बतायी है “हर जीवन को मौत का स्वाद चखना है फिर तुम सब हमारी ही ओर लौटाए जाओगे ।”

(अनुवाद कुरआन, अन्कबूत 29:57) इस आयत के दो भाग हैं। पहला यह कि हरेक जीव को मौत का स्वाद चखना है। यह ऐसी बात है कि हर धर्म, हर वर्ग और हर स्थान का आदमी इस बात पर विश्वास करता है बल्कि जो धर्म को भी नहीं मानता वह भी इस सच्चाई के सामने सिर झुकाता है और जानवर तक मौत की सच्चाई को समझते हैं। चूहा, बिल्ली को देखते ही अपनी जान बचाकर भागता है और कुत्ता भी सड़क पर आती हुई किसी गाड़ी को देख कर अपनी जान बचाने के लिए तेज़ी से हट जाता है, क्योंकि ये जानते हैं कि यदि इन्होंने ऐसा न किया तो उनका मर जाना निश्चित है।

मरने के बाद क्या होगा?

इस आयत के दूसरे भाग में कुरआन एक और बड़ी सच्चाई की ओर हमारा ध्यान आकृष्ट करता है। यदि वह मुनष्य की समझ में आ जाए तो सारे संसार का वातावरण बदल जाए। वह सच्चाई यह है कि तुम मरने के बाद मेरी ही ओर लौटाए जाओगे और इस संसार में जैसा काम करोगे वैसा ही बदला पाओगे।

मरने के बाद तुम मिट्टी में मिल जाओगे या सड़ गल जाओगे और दोबारा जीवित नहीं किए जाओगे, ऐसा नहीं है और न यह सच है कि मरने के बाद तुम्हारी आत्मा किसी और शरीर में प्रवेश कर जाएगी। यह दृष्टिकोण किसी भी दृष्टि से मानव बुद्धि की कसोटी पर खरा नहीं उतरता।

भेदभाव क्यों?

पहली बात यह है कि आवागमन का यह काल्पनिक विचार वेदों में मौजूद नहीं है, बाद के पुराणों (देवमालाई कहानियों) में इसका उल्लेख है। इस विचारधारा की शुरूआत इस प्रकार हुई कि शैतान ने धर्म के नाम पर लोगों को ऊंच नीच में जकड़ दिया। धर्म के नाम पर शूद्रों से सेवा कराने और उनको नीच और तुच्छ समझने वाले धर्म के ठेकेदारों से समाज के दबे कुचले वर्ग के लोगों ने जब यह सवाल किया कि जब हमारा पैदा करने वाला ईश्वर है और उसने सारे मनुष्यों को आंख, कान, नाक, हर वस्तु में समान बनाया है तो आप लोग अपने आपको ऊंचा और हमें नीचा और तुच्छ क्यों समझते हैं? इसका उन्होंने आवागमन का सहारा लेकर यह जवाब दिया कि तुम्हारे पिछले जीवन के बुरे कामों ने तुम्हें इस जन्म में नीच और अपमानित बनाया है। 

इस विचारधारा के अनुसार सारी आत्माएं दोबारा पैदा होती हैं। और अपने अपने कामों के हिसाब से शरीर बदल बदल कर आती हैं। अधिक बुरे काम करने वाले लोग जानवरों के शरीर में पैदा होते हैं। इनसे और अधिक बुरे काम करने वाले वनस्पति के रूप में आ जाते हैं, जिनके काम अच्छे होते हैं, वे आवागमन के चक्कर से मुक्ति पा जाते हैं।

पिछले जन्म ki सच्चाई

आवागमन के विरुद्ध तीन तर्क

1. इस संबंध में सबसे बड़ी बात यह है कि वैज्ञानिकों का कहना है कि इस धरती पर सबसे पहले बनस्पति पैदा हुई, फिर जानवर पैदा हुए और उसके करोड़ों साल बाद मनुष्य का जन्म हुआ । अब जबकि मनुष्य अभी इस धरती पर पैदा ही नहीं हुआ था और किसी मानव आत्मा ने अभी बुरा काम किया ही नहीं था तो सवाल पैदा होता है कि वे किसकी आत्माएं थीं, जिन्होंने अनगिनत जानवरों और पेड़ पौधों के रूप में जन्म लिया ?

2. दूसरी बात यह है कि इस विचार धारा को मान लेने के बाद तो यह होना चाहिए था कि धरती पर जानदारों की संख्या में निरंतर कमी होती रहती। जो आत्माएं आवागमन से मुक्ति पा लेतीं, उनकी संख्या कम होती रहनी चाहिए थी, जबकि यह वास्तविकता हमारे सामने है कि धरती पर मनुष्यों, जानवरों और बनस्पति हर प्रकार के जीवों की संख्या में निरंतर बड़ी भारी वृद्धि हो रही है। 

3. तीसरी बात यह है कि इस दुनिया में पैदा होने वालों और मरने वालों की संख्या में धरती व आकाश के जितना अन्तर दिखाई देता है, मरने वालों की तुलना में पैदा होने वालों की संख्या कहीं अधिक है। खरबों अनगिनत मच्छर पैदा होते हैं, जबकि मरने वाले इससे बहुत कम हैं। कभी अपने देश में किसी किसी बच्चे के बारे में यह बात फैल जाती है कि वह उस जगह को पहचान रहा है, जहां वह पिछले जन्म में रहता था। अपना पुराना नाम भी बता रहा है और यह भी कि उसने दोबारा जन्म लिया है। सच्ची बात तो यह है कि इन सारी बातों का वास्तविकता से कोई संबंध नहीं होता। इस प्रकार की चीजें विभिन्न प्रकार की मनोवैज्ञानिक व मानसिक रोग या आध्यात्मिक व सामाजिक व हालात की प्रतिक्रिया का नतीजा होती हैं, जिनका सुचारू रूप से इलाज कराया जाना चाहिए। वास्तविकता से इनका दूर तक कोई वास्ता नहीं होता।

सच्ची बात यह है कि हक़ीकृत मरने के बाद हर मनुष्य के सामने आ जाएगी कि मनुष्य मरने के बाद अपने पैदा करने वाले स्वामी के पास जाता है और उसने इस संसार में जैसे अच्छे काम किए होंगे, उसके हिसाब से प्रलय में दंड या इनाम पाएगा।

Kya कर्मों का फल मिलेगा?

यदि मनुष्य अपने पालनहार की उपासना और उसकी बात मानते हुए अच्छे काम करेगा, भलाई और सदाचार के रास्ते पर चलेगा तो वह अपने पालनहार की कृपा से जन्नत में जाएगा। जन्नत, जहां आराम की हर वस्तु है, बल्कि वहां तो आनंद व सुख वैभव की ऐसी वस्तुएं भी हैं, जिनको इस दुनिया में न किसी आँख ने देखा न किसी कान ने सुना न किसी दिल में उनका विचार आया और जन्नत की सबसे बड़ी नेमत यह होगी कि जन्नती लोग वहां अपनी आंखों से अपने स्वामी एवं पालनहार को देख सकेंगे, जिसके बराबर आनन्द और हर्ष की कोई वस्तु नहीं होगी।

इसी तरह जो लोग बुरे काम करेंगे अपने पालनहार के साथ दूसरों को भागी बनाएंगे और विद्रोह करके अपने स्वामी के आदेश का इन्कार करेंगे वे नरक में डाले जाएंगे। वे वहां आग में जलेंगे। वहाँ उनको उनके बुरे कामों और अपराधों का दंड मिलेगा और सबसे बड़ा दंड यह होगा कि वे अपने स्वामी को देखने से वंचित रह जाएंगे और उन पर उनके स्वामी की दर्दनाक यातना होगी। 

पालनहार का साक्षी बनाना सबसे बड़ा गुनाह

उस सच्चे असली स्वामी ने अपनी किताब कुरआन में हमें बताया कि मलाइयां और सदकर्म छोटे भी होते हैं और बड़े भी इसी तरह उस स्वामी के यहां अपराध, पापा और बुरे काम भी छोटे बड़े होते हैं। उसने हमें बताया है कि जो अपराध व पाप मनुष्य को सबसे अधिक और भयानक दंड का भोगी बनाता है, जिसे वह कभी क्षमा नहीं करेगा और जिसको करने वाला सदैव के लिए नरक में जलता रहेगा। वह नरक से बाहर नहीं जा सकेगा। वह मौत की इच्छा करेगा परन्तु उसे मौत कभी न आएगी।

वह अपराध इस अकेले ईश्वर, पालनहार के साथ, उसके गुणों व अधिकारों में किसी को भागीदार बनाना है, इसके अलावा किसी दूसरे के आगे अपना सिर या माथा टेकना है और किसी और को पूजा योग्य मानना, मारने वाला, जीवित करने वाला, आजीविका देने वाला, लाभ व हानि का मालिक समझना बहुत बड़ा पाप और अत्यन्त ऊंचे दर्जे का जुल्म है, चाहे ऐसा किसी देवी देवता को माना जाए या सूरज चांद, सितारे या किसी पीर फकीर को, किसी को भी उस एक मात्र स्वामी के गुणों में बराबर का या भागीदार समझना शिर्क (बहुदेववाद) है, जिसे वह स्वामी कभी क्षमा नहीं करेगा। इसके अलावा किसी भी गुनाह को यदि वह चाहे तो माफ कर देगा। इस पाप (अर्थात शिर्क) को स्वयं हमारी बुद्धि भी इतना ही बुरा समझती है। और हम भी इस काम को उतना ही अप्रिय समझते हैं।

साक्षी बनाना- एक उदाहरण

उदाहरण स्वरूप यदि किसी की पत्नी बड़ी नकचढ़ी हो, सामान्य बातों पर झगड़े पर उतर आती हो, कुछ कहना सुनना नहीं मानती हो, लेकिन पति यदि इस घर से उसे निकलने को कह दे तो वह कहती है कि मैं केवल तेरी हूं, तेरी ही रहूंगी, तेरे ही दरवाज़े पर मरूंगी और एक क्षण के लिए तेरे घर से बाहर नहीं जाऊंगी तो पति लाख क्रोध के बाद भी उसे निभाने के लिए मजबूर हो जाएगा।

इसके विपरीत यदि किसी की पत्नी बड़ी सेवा करने वाली, आदेश का पालन करने की पाबन्द हो, वह हर समय उसका ध्यान रखती हो, पति आधी रात को घर आता हो तो उसकी प्रतीक्षा करती हो, उसके लिए खाना गर्म करके उसके सामने रख देती हो, उससे प्रेम भरी बातें भी करती हो, वह एक दिन उससे कहने लगे कि आप मेरे जीवन साथी हैं लेकिन मेरा अकेले आप से काम नहीं चलता, इसलिए अपने अमुक पड़ौसी को भी मैंने आज से अपना पति बना लिया है तो यदि उसके पति में कुछ भी ग़ैरत होगी तो वह यह बात कदापि सहन नहीं कर सकेगा। वह एक क्षण के लिए भी ऐसी एहसान फ़रामोश, निर्लज्ज और ख़राब औरत को अपने पास रखना पसन्द नहीं करेगा।

आखिर ऐसा क्यों है? केवल इसलिए कि कोई पति अपने पति होने के विशेष अधिकारों में किसी को भागीदार देखना नहीं चाहता। आप वीर्य की एक बून्द से बनी अपनी सन्तान में किसी और को अपना साझी बनाना पसन्द नहीं करते तो वह स्वामी जो अत्यन्त तुच्छ बून्द से मनुष्य को पैदा करता है वह कैसे यह सहन कर लेगा कि उसका पैदा किया हुआ मनुष्य उसके साथ किसी और को उसका साझी या भागीदार बनाए, उसके साथ किसी दूसरे की उपासना की जाए और बात मानी जाए, जबकि इस पूरे संसार में जिसे जो कुछ दिया है उसी ने प्रदान किया है।

जिस प्रकार एक वैश्या अपनी इज्ज़त व सतीत्व बेच कर हर आने वाले आदमी को अपने ऊपर कुब्ज़ा दे देती है तो इसी कारण वह हमारी नज़रों से गिरी हुई रहती है, वह आदमी भी अपने स्वामी की नज़रों में इससे कहीं अधिक नीच, अपमानित और गिरा हुआ है, जो उसे छोड़ कर किसी दूसरे की उपासना में मस्त हो, चाहे वह कोई देवता हो या फरिश्ता जिन्न हो या मनुष्य, मूर्ति हो या त हो या अस्थान या कोई दूसरी काल्पनिक वस्तु।

Leave a Reply

Your email address will not be published.