हौज़े कौसर से किन्को हटाया जयेगा ?| हौज़े कौसर की ख़ूबियां | Dawat-e-Tabligh

एक परनाला सोने का और दूसरा चांदी का होगा। ‘ मेरे और उनके दर्मियान आड़ लगा दी जाएगी और वे पीने से महरूम रह जाएंगे। हौज़े कौसर से किन्को हटाया जयेगा ?| हौज़े कौसर की ख़ूबियां | Dawat-e-Tabligh….

हौज़े कौसर से किन्को हटाया जयेगा ?| हौज़े कौसर की ख़ूबियां | Dawat-e-Tabligh
हौज़े कौसर से किन्को हटाया जयेगा ?| हौज़े कौसर की ख़ूबियां | Dawat-e-Tabligh

हौज़े कौसर

हश्र के मैदान में बड़ी भारी तादाद में हौज़ होंगे। आहज़रत सैयदे आलम ने फरमाया कि हर नबी का एक हौज़ होगा और सब नबी आपस में इस पर फन करेंगे कि किस के पास पीने वाले ज़्यादा आते हैं (हर नबी के हौज़ से उसके उम्मती पानी पीएंगे) और मैं उम्मीद करता हूं कि सबसे ज़्यादा लोग मेरे पास पीने के लिए आएंगे।

हज़रत मुहम्मद के हौज़े कौसर की ख़ूबियां

हज़रत अब्दुल्लाह बिन अम्र रिवायत फ़रमाते हैं कि आंहज़रत सैयदे आलम ने इर्शाद फ़रमाया कि मेरे हौज़ की लम्बाई-चौड़ाई इतनी ज़्यादा है कि उसके एक तरफ़ से दूसरी तरफ़ जाने के लिए एक महीने की मुद्दत चाहिए और उसके कोने बराबर हैं (यानि वह चौकोर है, लम्बाई-चौड़ाई दोनों बराबर हैं) उसका पानी दूध से ज़्यादा सफ़ेद है और उसकी खुश्बू मुश्क से ज़्यादा उम्दा है और उसके लोटे इतने हैं जितने आसमान के सितारे हैं जो उसमें से पीयेगा, कभी प्यासा न होगा

-बुखारी व मुस्लिम

हज़रत अबू हुरैरः ने रिवायत है कि आंहज़रत ने फ़रमाया कि बेशक मेरा हौज़ इतना लंबा-चौड़ा है कि उसके दोनों किनारों के दर्मियान उस फ़ासले से भी ज़्यादा फासला है जो एला से अदन तक है। सच जानो वह बर्फ से ज़्यादा सफ़ेद और शहद से ज़्यादा मीठा है। जो दूध में मिला हुआ हो और उसके बर्तन सितारों की तादाद से ज़्यादा हैं और मैं (दूसरी उम्मतों) को अपने हौज़ पर आने से हटाऊंगा। जैसे (दुनिया में ) कोई शख़्स दूसरों के ऊंटों को अपने हौज़ से हटाता है। सहाबा ने अर्ज़ किया-ऐ अल्लाह के रसूल ! क्या उस दिन आप हमको पहचानते होंगे? इर्शाद फ़रमाया, हां (ज़रूर पहचान लूंगा, इसलिए कि) तुम्हारी एक निशानी होगी जो और किसी उम्मत की न होगी और वह यह कि तुम हौज़ पर मेरे पास इस हाल में आओगे कि वुज़ू के आसार से तुम्हारे चेहरे रौशन होंगे और हाथ-पांव सफेद होंगे।

– मुस्लिम

दूसरी रिवायत में यह भी आप इर्शाद फ़रमाया कि आसमान के की तादाद में हौज़ के अंदर सोने-चांदी के लोटे नज़र आ रहे होंगे’ यह भी इर्शाद फ़रमाया कि इस हौज़ में दो परनाले गिर रहे होंगे जो जन्नत (की नहर से उसके पानी में बढ़ौतरी कर रहे होंगे। एक परनाला सोने का और दूसरा चांदी का होगा।’ 

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हौज़ की लम्बाई-चौड़ाई कई तरह इर्शाद फ़रमायी है, कहीं एक माह की दूरी उसके किनारों के दर्मियान फ़रमाया; कहीं एला और अदन के बीच की दूरी से इसे नापा; कहीं कुछ और फ़रमाया। इन मिसालों का मक़सद हौज़ की लम्बाई-चौड़ाई को समझाना है, नापी हुई दूरी बताना मुराद नहीं है। मौजूद लोगों के हिसाब से वह दूरी ज़िक्र फ़रमायी है जिसे वे समझ सकते थे। खुलासा तमाम रिवायतों का यह है कि हौज़ की दूरी सैकड़ों मील है। 

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सबसे पहले हौज़े कौसर पर कौन पहुंचे गा ?

हज़रत अब्दुल्लाह बिन उमर रिवायत फ़रमाते हैं कि आंहज़रत सैयदे आलम ने इर्शाद फ़रमाया कि मेरा हौज़ इतना बड़ा है जितना अदन’ और ओमान के दर्मियान फासला है। बर्फ से ज़्यादा ठंढा और शहद से ज़्यादा मीठा है और मुश्क़ से बेहतर उसकी खुश्बू है। उसके प्याले आसमान के सितारों से भी ज़्यादा हैं जो उसमें से एक बार पी लेगा, उसके बाद कभी भी प्यासा न होगा। सबसे पहले पीने के लिए उस पर मुहाजिर फ़ुकुरा (मुहताज) आएंगे। किसी ने ( मौजूद लोगों में से) सवाल किया कि ऐ अल्लाह के रसूल । उनका हाल बता दीजिए? फ़रमाया ये वह लोग हैं (दुनिया में) जिनके सरों के बाल बिखरे हुए और चेहरे (भूख, मेहनत व थकन की वजह से) बदले होते थे। इनके लिए (बादशाहों और हाकिमों) के दरवाज़े नहीं खोले जाते थे और अच्छी औरतों इनके निकाह में नहीं दी जाती थीं और (इनके मामलों की ख़ूबी का यह हाल था कि) इनके ज़िम्मे जो हक (किसी का) होता था तो सब चुका देते थे और इनका जो (हक किसी पर) होता था तो पूरा न लेते थे (बल्कि थोड़ा बहुत छोड़ देते थे।

यानी दुनिया में उनकी बदहाली और तंगी का यह हाल था कि बाल सुधारने और कपड़े साफ रखने की ताकत भी न थी और ज़ाहिर है संवारने के उनको ऐसा ख़ास ध्यान भी न था कि बनाव- सिंगार के चोंचले में वक्त गुज़ारते और आख़िरत से गफलत बरतते । उनको दुनिया में फिक्र – मुसीबतें इस तरह घेरी रहते थीं कि चेहरों पर उनका असर ज़ाहिर था। दुनिया वाले उनको ऐसा नीच समझते थे कि मज्लिसों, जश्नों और शाही दरबारों में उनको दावत देकर बुलाना तो दूर की बात उनके लिए ऐसे मौकों में दरवाज़े ही न खोले जाते थे और वे औरतें जो नाज़ व नेमत में पली थीं, इन खुदा के ख़ास बन्दों के निकाहों में नहीं दी जाती थीं मगर आख़िरत में उनका रुत्वा होगा कि हौज़ कौसर पर सबसे पहले पहुंचेंगे। उनको नीच समझने वाले और उनके बाद उस पाक हौज़ से पी सकेंगे (बशर्ते कि ईमान वाले और उसमें से पीने के लायक हों)।

हज़रत उमर बिन अब्दुल अज़ीज़ (रह०) के सामने आंहज़रत सैयदे आलम का यह इर्शाद सुनाया गया कि हौज़े कौसर पर सबसे पहले फ़ुकुरा मुहाजिरीन पहुंचेंगे जिनके सर बिखरे हुए और कपड़े मैले रहते थे और जिनसे अच्छी औरतों के निकाह न किये जाते थे और जिनके लिए दरवाज़े नहीं खोले जाते थे। नबी करीम के इस इर्शाद को सुनकर हज़रत उमर बिन अब्दुल अज़ीज़ (घबरा गये) और बेइख़्तियार फ़रमाया कि मैं तो ऐसा नहीं हूं। मेरे निकाह में अब्दुल मलिक की बेटी फ़ातिमा (शाहज़ादी) है और मेरे लिए दरवाज़े खोले जाते हैं। अब तो ज़रूर ही ऐसा करूंगा कि उस वक़्त तक सर को न धोऊंगा जब तक बाल बिखर न जाया करेंगे और न अपने बदन का कपड़ा उस वक़्त तक धोऊंगा जब तक मैला न हो जाया करे।

हज़रत उमर बिन अब्दुल अज़ीज़ (रह०) वक़्त के खलीफा और इस्लामी सरकार के चलाने वाले थे। आख़िरत की फिक्र के उनके बड़े-बड़े किस्से एतबार वाली किताबों में मिलते हैं।

हौज़े कौसर से किन्को हटाया जयेगा ?

हौज़े कौसर से हटाये जाने वाले

हज़रत सह्ल बिन सजूद से रिवायत है कि रसूले करीम ने इर्शाद फ़रमाया कि यकीन जानो (क़ियामत के दिन) हौज़ पर तुम्हारा मेरा सामना होगा (यानी मैं तुमको पिलाने के लिए पहले पहुंचा हुआ हूंगा)। जो मेरे पास से होकर गुज़रेगा, पी लेगा और जो (मेरे पास हीज़ से) पी लेगा, कभी प्यासा न होगा। फिर इर्शाद फ़रमाया ऐसा ज़रूर होगा कि पीने के लिए मेरे पास ऐसे लोग आएंगे, जिनको में पहचानता हूंगा और वे मुझे पहचानते होंगे, फिर (उनको मुझ तक पहुंचने न दिया जाएगा बल्कि) मेरे और उनके दर्मियान आड़ लगा दी जाएगी और वे पीने से महरूम रह जाएंगे। मैं कहूंगा ये तो मेरे आदमी हैं (इनको आने दिया जाए)। इसपर (मुझ से) कहा जाएगा कि आप नहीं जानते कि आपके बाद उन्होंने क्या नयी चीजें निकाली थीं, यह सुनकर मैं कहूंगा दूर हो, जिन्होंने मेरे बाद अदल-बदल किया।

-बुखारी व मुस्लिम शरीफ

दुनियादार पीर-फकीर या मौलवी – मुल्ला अगर कहें कि पूल काम में सवाब है और अच्छा है तो उनसे सबूत मांगी और पूछो कि बताओ आहज़रत ने किया है या नहीं? और हदीस शरीफ की किस किताब में लिखा है कि आंहज़रत सैयदे आलम को ऐसा करना पसंद था या आपने इसको अंजाम दिया है।

मरने-जीने और व्याह-शादी में औरतों ने और दुनियादार पीरों-फकीरों ने बड़ी बिटूअतें और गैर शरई रस्में निकाल रखी हैं। सोयम, चेहल्लुम, क्रद्र पर चादर, कृत्र का गुस्ल, संदल, उर्स, पक्की कब्र और इसी तरह की बहुत सी बातें जो कब्रों पर होती है, विदद्भुत हैं। ऐसा करने वाले अंजाम सोच लें। हौज़े कौसर से हटाये जाने को तैयार रहें और कुछ का तवाफ़ और कुत्र को या पीर को सज्दा यह तो शिर्क है, जो गुनाह में बिदअत से कहीं ज़्यादा बढ़ा हुआ है।

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