Shaitan kaise फसाता hai ? | Shaitan ने Ladki के दिल में mohabbat dali – Dawat~e~Tabligh

Shaitan का नमाज फडना। Shaitan ने Ladki के दिल में mohabbat dali। Mout के waqut Shaitan की कोशिश। Ladki का sajnasawarna in Hindi, Shaitan kaise फसाता hai ? | Shaitan ने Ladki के दिल में mohabbat dali – Dawat~e~Tabligh..

Shaitan kaise फसाता hai ? | Shaitan ने Ladki के दिल में mohabbat dali - Dawat~e~Tabligh
Shaitan kaise फसाता hai ? | Shaitan ने Ladki के दिल में mohabbat dali – Dawat~e~Tabligh
  •  शैतान की कहानी उसकी जवानी- आग़ाज़ तो अच्छा है अंजाम ख़ुदा जाने

शैतान के मक व फरेब के बारे में हदीस पाक में बहुत ही अजीव वाक़िआ आया है। इब्ने आमिर ने उबैद बिन यसार से लेकर नबी अलैहि० तक इस वाक़िये की सनद पहुंचाई है। यह वाक़िआ तल्बीसे इब्लीस में भी नकल किया गया है।

बनी इसराईल में बरसीसा नामी एक राहिब था। उस वक़्त बनी इसराईल में उस जैसा कोई इबादत गुज़ार नहीं था। उसने एक इबादतखाना बनाया हुआ था। वह उसी में इबादत में मस्त रहता था। उसे लोगों से कोई ग़र्ज़ नहीं थीं। न तो वह किसी से मिलता था और न ही किसी के पास आता जाता था। शैतान ने उसे गुमराह करने का इरादा किया।

Shaitan kaise फसाता hai ?

बरसीसा अपने कमरे से बाहर निकलता ही नहीं था। यह ऐसा इबादत गुज़ार था कि अपना वक़्त हरगिज़ ज़ाया नहीं करता था। शैतान ने देखा कि जब दिन में कुछ वक्त यह थकते हैं तो कभी-कभी अपनी खिड़की से बाहर शांक कर देख लेते हैं। उधर कोई आबादी नहीं थी उसका अकेला सोमआ था। उसके इर्द-गिर्द खेत और बाग थे जब उसने देखा कि वह दिन में एक या दो मर्तबा खिड़की से देखते हैं तो उस मर्दूद ने इंसानी शक्ल में आकर उस खिड़की के सामने नमाज़ की नीयत बांध ली….उसको नमाज़ क्या पढ़नी थी, फक्त शक्ल बनाकर खड़ा था…. अब देखो कि जिसकी जो लाइन होती है उसको गुमराह करने के लिए उसके मुताबिक (दिलकश) वरूप बनाना है-

चुनांचे जब उसने खिड़की में से बाहर झांका तो एक आदमी की कयाम की हालत में देखा। वह बड़ा हैरान हुआ। जब दिन के दूसरे हिस्से में उसने दोवारा इरादतन बाहर देखा तो वह रुकूअ में था बड़ा लम्बा रुकूअ किया। 1 फिर तीसरी मर्तबा सज्दे की हालत में देखा। कई दिन इसी तरह होता रहा। आहिस्ता आहिस्ता वरसीसा के दिल में यह बात आने लगी कि यह तो कोई बड़ा ही बुजुर्ग इंसान है जो दिन-रात इतनी इबादतें कर रहा है। वह कई महीनों तक इसी तरह शक्ल बनाकर क़याम, रुकूअ और सज्दे करता रहा, यहां तक कि बरसीसा के दिल में यह बात आने लगी कि मैं उससे पूछे तो सही कि वह कौन है?

Shaitan का नमाज फडना

जय वरसीसा के दिल में यह बात आने लगी तो शैतान ने खिड़की के करीय मुसल्ला बिछाना शुरू कर दिया। जब मुसल्ला खिड़की के करीब आ गया और बरसीसा ने बाहर झांका तो उसने शैतान से पूछा, तुम कौन हो? वह कहने लगा, आपको मुझसे क्या गर्ज़ है, मैं अपने काम में लगा हुआ हूं, मुझे डिस्टर्ब न करें। वह सोचने लगा कि अजीब बात है कि किसी की कोई बात सुनना गवारा ही नहीं करता। दूसरे दिन बरसीसा ने पूछा कि आप अपना तआरुफ़ तो करवाएं। वह कहने लगा, मुझे अपना काम करने दो।

अल्लाह की शान कि एक दिन बारिश होने लगी। वह बारिश में भी नमाज़ की शक्ल बनाकर खड़ा हो गया। बरसीसा के दिल में बात आई कि जब यह इतना इबादत गुज़ार है कि उसने बारिश की भी कोई परवाह नहीं की, क्यों न मैं ही अच्छे अखलाक का मुजाहिरा करूं और इससे कहूं कि मियां ! अंदर आ जाओ। चुनांचे उसने शैतान को पेशकश की कि बाहर बारिश हो रही है, तुम अंदर आ जाओ। वह जवाब में कहने लगा कि ठीक है, मोमिन को मोमिन की दावत क़बूल कर लेनी चाहिए, लिहाजा मैं आपकी दावत क़बूल कर लेता हूं। वह तो चाहता ही यही था। चुनांचे उसने कमरे में आकर नमाज़ की नीयत बांध ली। वह कई महीनों तक उसके कमरे में इबादत की शक्ल में बना रहा। वह दरअस्ल इबादत नहीं कर रहा था, फ़क़त नमाज़ की शक्ल बना रहा था, लेकिन दूसरा यही समझ रहा था कि वह नमाज़ पढ़ रहा है। उसको नमाज़ से क्या गर्ज थी, वह तो अपने मिशन पर था।

जब कई महीने गुज़र गए तो बरसीसा ने उसे वाकई बहुत बड़ा बुजुर्ग समझना शुरू कर दिया और उसके दिल में उसकी अकीदत पैदा होना गई। इतने असे के बाद शतान बरसीसा से कहने लगा कि अब मेरा साल पूरा हो शुरू हो चुका है लिहाज़ा में अब यहां से जाता हूं। मेरा मक़ाम कहीं और है। रवाना होते वक़्त वैसे ही दिल नर्म हो चुका होता है लिहाज़ा वह बरसीसा से कहने लगा, अच्छा मैं आपको जाते-जाते एक ऐसा तोहफ़ा दे जाता हूं जो मुझे अपने बड़ों से मिला था। वह तोहफ़ा यह कि अगर तुम्हारे पास कोई भी बीमार आए तो उस पर यह पढ़कर दम कर दिया करना, वह ठीक हो जाया करेगा। तुम भी क्या याद करोगे कि कोई आया था और तोहफ़ा दे गया था। वरसीसा ने कहा, मुझे इसकी कोई ज़रूरत नहीं है। वह कहने लगा कि हमें यह नेमत तवील मुद्दत की मेहनत के बाद मिली हैं, मैं वह नेमत तुम्हें तोहफ़े में दे रहा हूं और तुम इंकार कर रहे हो, तुम तो बड़े नालायक़ इंसान हो। यह सुनकर बरसीसा कहने लगा, अच्छा जी, मुझे भी सिखा ही दें। चुनांचे शैतान ने उसे एक दम सिखा दिया और यह कहते हुए रुख्सत हो गया कि अच्छा फिर मिलेंगे।

Shaitan ने Baadshah की लड़की को बीमार किया

वह वहां से सीधे बादशाह के घर गया। बादशाह के तीन बेटे और एक बेटी थी। शैतान ने जाकर उसकी बेटी पर असर डाला और वह मजनूना-सी बन गई। यह खूबसूरत और पढ़ी-लिखी लड़की थी, लेकिन शैतान के असर से उसे दौरे पड़ना शुरू हो गए। बादशाह ने उसके इलाज के लिए हकीम और डॉक्टर बुलवाए। कई दिनों तक वह उसका इलाज करते रहे, लेकिन कोई फ़ायदा न हुआ।

Ladki का बीमार होना

जब कई दिनों के इलाज के बाद भी कुछ इफ़ाक़ा न हुआ तो शैतान ने बादशाह के दिल में यह बात डाली कि बड़े हकीमों और डॉक्टरों से इलाज तो करवा लिया है, अब किसी दम वाले ही से दम करवा कर देख लो। यह ख्याल आते ही उसने सोचा कि हां, किसी दम वाले को तलाश करना चाहिए। चुनांचे उसने अपने सरकारी नुमाइंदे भेजे ताकि वह पता करके आएं कि इस वक्त सबसे ज़्यादा नेक बन्दा कौन है? सबने कहा कि इस वक़्त सबसे ज़्यादा नेक आदमी तो बरसीसा है और वह तो किसी से मिलता ही नहीं है। बादशाह ने कहा कि अगर वह किसी से नहीं मिलता तो उनके पास जाकर मेरी तरफ़ से दरख्वास्त करो कि हम आपके पास आ जाते हैं ।

कुछ आदमी बरसीसा के पास गए। उसने उन्हें देखकर कहा आप मुझे डिस्टर्ब करने क्यों आए हैं? उन्होंने कहा कि बादशाह की बेटी बीमार है। हकीमों और डॉक्टरों से बड़ा इलाज करवाया, लेकिन कोई फ़ायदा नहीं हुआ। बादशाह चाहते हैं कि आप बेशक यहां न आएं कि आपकी इबादत में खलल न आए, हम आपके पास बच्ची को लेकर आ जाते हैं। आप यहीं उस बच्ची को दम कर देना, हमें उम्मीद है कि आपके दम करने से वह ठीक हो जाएगी। उसके दिल में ख्याल आया कि हां, मैंने एक दम सीखा तो था, उस दम को आज़माने का यह अच्छा मौका है। चलो, यह तो पता चल जाएगा कि वह दम ठीक भी है या नहीं। चुनांचे उसने उन लोगों को बादशाह की बेटी को लाने की इजाज़त दे दी।

बादशाह अपनी बेटी को बरसीसा के पास लेकर आ गया। उसने जैसे ही दम किया वह फ़ौरन ठीक हो गई। मर्ज़ भी शैतान ने लगाया था और दम भी उसी ने बताया था। लिहाज़ा दम करते ही शैतान उसको छोड़कर चला गया और वह बिल्कुल ठीक हो गई। बादशाह को पक्का यकीन हो गया कि मेरी बेटी उसके दम से ठीक हुई है।

एक-डेढ़ माह के बाद उसने फिर उसी तरह बच्ची पर हमला किया और वह उसे फिर बरसीसा के पास ले आए। उसने दम किया तो वह फिर उसे छोड़कर चला गया यहां तक कि दो-चार दिन के बाद बादशाह को पक्का यक़ीन हो गया कि मेरी बेटी का इलाज उसके दम में है। अब बरसीसा की बड़ी शोहरत हुई कि उसके दम से बादशाह की बेटी ठीक हो जाती है।

Baadshah अपनी ladki ko बरसीसा के पास छोड़ा

कुछ अर्से के बाद उस बादशाह के मुल्क पर किसी ने हमला किया। वह अपने शहज़ादों के हमराह दुश्मन का मुक़ाबला करने के लिए तैयारी करने लगा। अब बादशाह सोच में पड़ गया कि अगर जंग में जाएं तो बेटी को किसके पास छोड़कर जाएं। किसी ने मशवरा दिया कि किसी वज़ीर के पास छोड़ जाएं और किसी ने कोई मशवरा दिया। बादशाह कहने लगा कि अगर इसको दोबारा बीमारी लग गई तो फिर क्या बनेगा? बरसीसा तो किसी की बात भी नहीं सुनेगा। चुनांचे बादशाह ने कहा कि मैं खुद बरसीसा के पास अपनी बेटी को छोड़ जाता हूँ….देखो शैतान कैसे जोड़ मिला रहा है… बादशाह अपने और बेटी को बरसीसा के पास पहुंच गया और कहने लगा कि हम जंग पर जा रहे हैं, ज़िंदगी और मौत का पता नहीं है। मुझे इस वक़्त सबसे ज़्यादा एतिमाद तुम्हीं पर है और मेरी बेटी का इलाज भी तुम्हारे ही पास है लिहाजा मैं चाहता हूं कि यह बच्ची तुम्हारे पास ही ठहर जाए। बरसीसा कहले लगा, तौबा तौबा में यह काम कैसे कर सकता हूं कि यह अकेली मेरे पस ठहरे। बादशाह ने कहा नहीं ऐसी कोई बात नहीं है, बस आप इजाज़त दे दें, मैं इसके रहने के लिए आपके इबादतखाने के सामने एक घर बनवा देता हूं और यह उसी घर में ठहरेगी। वरसीसा ने यह सुनकर कहा, चलो ठीक है। जब उसने इजाजत दी तो बादशाह ने उसके इबादताने के सामने घर बनवा दिया और बच्ची को वहां छोड़कर जंग पर रवाना हो गए।

Ladki के लिया खाना बनाया

अब बरसीसा के दिल में बात आई कि मैं अपने लिए तो खाना बनाता ही हूं, अगर बच्ची का खाना भी मैं ही बना दिया करूं तो इसमें क्या हर्ज है। क्यों कि वह अकेली है पता नहीं कि अपने लिए खाना पकाएगी भी या नहीं पकाएगी। चुनांचे वह खाना बनाता और आधा ख़ुद खाकर बाक़ी आधा खाना अपने इबादतखाने के दरवाजे के बाहर रख देता और अपना दरवाजा खटखटा देता यह उस लड़की के लिए इशारा होता था कि अपना खाना उठा लो। इस तरह वह लड़की खाना उठाकर ले जाती और खा लेती। कई महीनों तक यही मामूल रहा।

उसके बाद शैतान ने उसके दिल में यह बात डाली कि देखो, वह लड़की अकेली रहती है, तुम खाना पकाकर अपने दरवाज़े के बाहर रख देते हो और लड़की को वह खाना उठाने के लिए गली में निकलना पड़ता है। अगर कभी किसी मर्द ने देख लिया तो वह तो उसकी इज़्ज़त ख़राब कर देगा। इसलिए बेहतर यह है कि खाना बनाकर उसके दरवाजे के अंदर रखा दिया करो ताकि उसको बाहर न निकलना पड़े। चुनांचे बरसीसा ने खाना बनाकर उसके दरवाजे के अंदर रखना शुरू कर दिया। वह खाना रखकर कुंडी खटखटा देता और वह खाना उठा लेती। यही सिलसिला चलता रहा।

Shaitan का दिल में बात डालना

जब कुछ और महीने भी गुजर गए तो शैतान ने उसके दिल में डाला कि तुम खुद तो इबादत में लगे रहते हो। यह लड़की अकेली है, ऐसा न हो कि तनहाई की वजह से और ज़्यादा बीमार हो जाए, इसलिए बेहतर है कि उसको कुछ नसीहत करो दिया करो ताकि यह भी इबादत गुज़ार बन जाए और उसका वक्त जाया न हो। यह ख्याल दिल में आते ही उसने कहा कि हां, यह बात तो बहुत अच्छी है, लेकिन इस काम की क्या तर्तीब होनी चाहिए। शैतान ने इस बात का जवाब भी उसके दिल में डाला कि उसको कह दो कि वह अपने घर की छत पर आ जाया करे और तुम भी अपने घर की छत पर बैठ जाया करो और उसे बाज़ व नसीहत किया करो। चुनांचे उसने इसी तर्तीब से बाज़ व नसीहत करना शुरू कर दी। उसके बाज़ का उस लड़की पर बड़ा असर हुआ। उसने नमाज़ें और वज़ीफ़े शुरू कर दिए। अब शैतान ने उसके दिल में यह बात डाली कि देख, तेरी नसीहत का इस पर कितना असर हुआ। ऐसी नसीहत तो हर रोज़ होनी चाहिए। चुनांचे उसने रोज़ाना नसीहत करनी शुरू कर दी।

इसी तरह करते-करते जब कुछ वक़्त गुज़र गया तो शैतान ने फिर उसके दिल में यह बात डाली कि तुम अपने घर की छत पर बैठते हो और वह अपने घर की छत पर बैठती है, रास्ते में से गुज़रनेवाले क्या बातें सोचेंगे कि यह कौन बातें कर रहे हैं? इस तरह तो बहुत ही ग़लत तास्सुर पैदा हो जाएगा, इसलिए बेहतर यह है कि छत पर बैठकर ऊंची आवाज़ से बात करने की बजाए तुम दरवाज़े से बाहर खड़े होकर तकरीर करो और वह दरवाज़े के अंदर खड़ी होकर सुन ले पर्दा तो होगा ही सही। चुनांचे अब तर्तीब से वाज़ व नसीहत शुरू हो गई। कुछ अर्से तक इसी तरह मामूल रहा।

उसके बाद शैतान ने फिर बरसीसा के दिल में ख़्याल डाला कि तुम बाहर खड़े रहकर तकरीर करते हो, देखने वाले क्या कहेंगे कि पागलों की तरह ऐसे ही बातें कर रहा है, इसलिए अगर तकरीर करनी ही है तो चलो किवाड़ के अंदर खड़े होकर कर लिया करो। वह दूर खड़ी होकर सुन लिया करेगी। चुनांचे अब उसने दरवाज़े के अंदर खड़े होकर तकरीर करनी शुरू कर दी। जब उसने अंदर खड़े होकर तक़रीर करनी शुरू की तो लड़की ने उसको बताया कि इतनी नमाज़ें पढ़ती हूं और इतनी इबादत करती हूं। यह सुनकर उसे बड़ी खुशी हुई कि मेरी बातों का इस पर बड़ा असर हो रहा है। अब मैं अकेला ही इबादत नहीं कर रहा हूं बल्कि यह भी इबादत कर रही है। कई दिन तक यही सिलसिला चलता रहा।

Shaitan ने Ladki के दिल में mohabbat dali

बिल आखिर शैतान ने लड़की के दिल में बरसीसा की मुहब्बत डाली ‘और बरसीसा के दिल में लड़की की मुहब्बत डाली। चुनांचे लड़की ने कहा कि आप जो खड़े-खड़े बयान करते हैं, आपके लिए चारपाई डाल दिया करूंगी, आप उस पर बैठकर बयान कर दिया करना और में दूर बैठकर सुन लिया करूंगी। उसने कहा, बहुत अच्छा। लड़की ने दरवाजे के क़रीब चारपाई डाल दीं। बरसीसा उस पर बैठकर नसीहत करता रहा और लड़की दूर बैठकर बात सुनती रही। इसी दौरान शैतान ने बरसीसा के दिल में लड़की के लिए बड़ी शफ़क़त व हमदर्दी पैदा कर दी। कुछ दिन गुज़रे तो शैतान ने आबिद के दिल में बात डाली कि नसीहत सुनानी तो लड़की को होती है, दूर बैठने की वजह से ऊंचा बोलना पड़ता है। गली से गुजरने वाले लोग भी सुनते हैं, कितना अच्छा हो कि यह चारपाई ज़रा आगे करके रख लिया करें और पस्त आवाज़ में गुफ़्तुगू कर लिया करें। चुनांचे बरसीसा की चारपाई लड़की की चारपाई के करीबतर हो गई और वाल व नसीहत का सिलसिला जारी रहा।

Ladki का sajna-sawarna 

कुछ अर्सा इसी तरह गुजरा तो शैतान ने लड़की को मुजव्यन करके बरसीसा के सामने पेश करना शुरू कर दिया और वह यूँ उस लड़की के हुस्न व जमाल का गर्वीदा होता गया। अब शैतान ने बरसीसा के दिल में जवानी के ख्यालात डालने शुरू कर दिए, यहां तक कि बरसीसा का दिल इबादतखाने से उचाट हो गया और उसका ज़्यादा वक्त लड़की से बातें करने में गुजर जाता। साल गुज़र चुका था। एक दफ़ा शहजादों ने आकर शहज़ादी की ख़बरगीरी की तो शहज़ादी को ख़ुश-खुर्रम पाया और साहिब के गुन गाते देखा। शहजादों को लड़ाई के लिए दोबारा सफ़र पर जाना था, इसलिए वह मुतमइन होकर चले गए। अब शहजादों के लिए जाने के बाद शैतान ने अपनी कोशिशें तेजतर कर दीं। चुनांचे उसने बरसीसा के दिल में लड़की का इश्क पैदा कर दिया और लड़की के दिल में बरसीसा का इश्क़ भर दिया। यहां तक कि दोनों तरफ़ बराबर की आग सुलग उठी।

Ladki का pregnant होना

अब जिस वक़्त आबिद नसीहत करता तो सारा वक़्त उसकी निगाहें शहजादी के चेहरे पर जमी रहतीं। शैतान लड़की को नाज अंदाज सिखाता और वह सरापा नाज़नी रश्क ऊमर अपने अंदाज़ व अतवार से बरसीसा का दिल लुभाती। यहां तक कि आबिद ने अलेहदा चारपाई पर बैठने की बजाए लड़की के साथ एक ही चारपाई पर बैठना शुरू कर दिया। अब उसकी निगाहें जब शहज़ादी के चेहर पर पड़ीं तो उसने उसे सरापा हुस्न व जमाल और जाज़िबे नज़र पाया। चुनांचे आबिद अपने शहवानी जज्बात पर काबू न रख सका और उस शहज़ादी की तरफ़ हाथ बढ़ाया। शहज़ादी ने मुस्कुराकर उसकी हौसला अफ़ज़ाई की। यहां तक कि बरसीसा जिना का मुस्तकिब हो गया। जब दोनों के दर्मियान से हया की दीवार हट गई और जिना के मुस्तकिब हुए तो वह आपस में मियां-बीवी की तरह रहने लग गए। इस दौरान शहज़ादी हामिला हो गई।

Gunnah को छुपाना

अब बरसीसा को फ़िक्र लाहिक़ हुई कि अगर किसी को पता चल गया तो क्या बनेगा, मगर शैतान ने उसके दिल में ख्याल डाला कि कोई फ्रिक की बात नहीं, जब वज़ा हमल होगा तो नौमालूद को ज़िंदा दरगोर कर देना और लड़की को समझा देना, वह अपना भी ऐब छुपाएगी और तुम्हारा ऐब भी छुपाएगी। इस ख़्याल के आते ही डर और ख़ौफ़ के तमाम हिजाब दूर हो गए और बरसीसा बेख़ौफ़ो ख़तर हवसपरस्ती और नफ़्सपरस्ती में मशगूल रहा।

एक वह दिन भी आया जब उस शहज़ादी ने बच्चे को जन्म दिया। जब बच्चे को वह दूध पिलाने लगी तो शैतान ने बरसीसा के दिल में डाला कि अब तो डेढ़-दो साल गुजर गए हैं और बादशाह और दीगर लोग जंग से वापस आने वाले हैं। शहज़ादी उनको सारा माजरा सुना देगी। इसलिए तुम इसका बेटा किसी बहाने से कत्ल कर दो ताकि गुनाह का सुबूत न रहे।

Ladki को मारने का khayal

चुनांचे एक दफ़ा शहज़ादी सोई हुई थी। उसने बच्चे को उठाया और क़त्ल करके घर के सेहन में दबा दिया। अब मां तो मां ही होती है। जब वह उठी तो उसने कहा, मेरा बेटा किधर है? उसने कहा, मुझे तो कोई ख़बर नहीं है मां ने इधर-उधर देखा तो बेटे का कहीं सुराग न मिला। चुनांचे वह उससे ख़फ़ा होने लगी। जब वह ख़फ़ा होने लगी तो शैतान ने बरसीसा के दिल में बात डाली कि देखो, यह मां है, यह अपने बच्चे को हरगिज़ नहीं भूलेगी। पहले तो न मालूम यह बताती या न बताती। अब तो यह ज़रूर बता देंगी लिहाजा अब एक ही इलाज बाक़ी है। लड़की को भी कतल कर दो, ताकि न रहे बांस न बाजे बासुरी। जब बादशाह आकर पूछेगा तो बता देना कि वह बीमार हुई थी और मर गई थी। जैसे ही उसके दिल में यह बात आई कहने लगा कि बिल्कुल ठीक है। चुनांचे उसने लड़की को भी कत्ल कर दिया और लड़के के साथ ही सेहन में दफ़न कर दिया। उसके बाद यह अपनी हाल में लग गया।

Baadshah का वापस आना

कुछ महीनों के बाद बादशाह सलामत वापस आ गए। उसने बेटों को भेजा कि जाओ अपनी बहन को ले आओ। वह बरसीसा के पास आए और कहने लगे, जी हमारी बहन आपके पास थी, हम उसे लेने आए हैं। बरसीसा उनकी बात सुनकर रो पड़ा और कहने लगा कि आपकी बहन बहुत अच्छी थी, बड़ी नेक थी और ऐसी-ऐसी इबादत करती थी, लेकिन वह अल्लाह को प्यारी हो गई। यह सेहन में उसकी क़ब्र है। भाइयों ने जब सुना तो वे रो-धोकर वापस चले गए।

Shaitan ने khawab में सब बता दिया

घर जाकर जब वह रात को सोए तो शैतान ख़्वाब में बड़े भाई के पास गया और उससे पूछने लगा, बताओ तुम्हारी बहन का क्या बना? वह कहने लगा, हम जंग के लिए गए हुए थे, उसे बरसीसा के पास छोड़कर गए थे, यह अब फ़ौत हो चुकी है। शैतान कहने लगा, वह तो फ़ौत नहीं हुई। उसने पूछा कि अगर फ़ौत नहीं हुई तो फिर क्या हुआ? वह कहने लगा बरसीसा ने ख़ुद यह करतूत किया है और उसने खुद उसे क़त्ल किया है और फलां जगह उसे दफ़न किया और बच्चे को उसने उसी के साथ दफ़न किया है। उसके बाद वह ख़्वाब में ही उसके दर्मियाने भाई के पास गया और उसको भी यही कुछ कहा और फिर उसके छोटे भाई के पास जाकर भी यही कुछ कहा।

Bhen ki qabar khodi

तीनों भाई जब सुबह उठे तो एक ने कहा, मैंने एक ख़्वाब देखा है। ख़्वाब सुनकर दूसरे ने कहा कि मैंने भी यही ख्वाब देखा और तीसरे ने कहा कि मैंने भी यही ख़्वाब देखा है। वे आपस में कहने लगे कि यह अजीब इत्तिफ़ाक़ है कि सबको एक जैसा ख़्वाब आया है। सबसे छोटे भाई ने कहा, वह इत्तिफ़ाक़ की बात नहीं है बल्कि मैं तो जाकर तहक़ीक़ करूंगा। दूसरे ने कहा, छोड़ो भाई यह कौन-सी बात है, जाने दो। वह कहने लगा, नहीं मैं तो ज़रूर तफ्तीश करूंगा। चुनांचे छोटा भाई गुस्से में आकर चल पड़ा। उसे देखकर बाकी भाई भी उसके साथ हो लिए। उन्होंने जब जाकर ज़मीन की खुदाई की तो उन्हें उसमें बहन की हड्डियां भी मिल गई और साथ ही छोटे से बच्चे की हड़ियों का ढांचा भी मिल गया।

जय सुबूत मिल गया तो उन्होंने बरसीसा को गिरफ्तार कर लिया। उसे जब क़ाज़ी के पास ले जाया गया तो उसने क़ाज़ी के रूबरू अपने इस घिनौने और मकरूह फ़ेल (काम) का इक़रार कर लिया और क़ाज़ी ने बरसीसा को फांसी देने का हुक्म दे दिया।

Mout के waqut Shaitan की कोशिश

जब बरसीसा को फांसी के तख्ते पर लाया गया और उसके गले में फंदा डाला गया और फिर फंदा खींचने का वक़्त आया तो फंदा खींचने से ऐन दो चार लम्हे पहले शैतान उसके पास वही इबादतगुज़ार की शक्ल में आया। वह उससे कहने लगा, “क्या मुझे पहचानते हो कि मैं कौन हूँ?” बरसीसा ने कहा, “हां, मैं तुम्हें पहचानता हूं तुम यही इबादतगुज़ार हो जिसने मुझे वह दम बताया था। शैतान ने कहा, वह दम भी आपको मैंने बताया था। लड़की को भी मैंने अपना असर डालकर बीमार किया था, उसे क़त्ल भी मैंने तुझसे करवाया था और अगर अब तू बचना चाहे तो मैं ही तुझे बचा सकता हूं। बरसीसा ने कहा, अब तुम मुझे कैसे बचा सकते हो? वह कहने लगा कि तुम मेरी एक बात मान लो तो मैं तुम्हारा यह काम कर देता हूं। उसने पूछा कि मैं आपकी कौन-सी बात मान लूं? उस शैतान ने कहा कि बस यह कह दो कि ख़ुदा नहीं है। बरसीसा के तो हवास बाख़्ता हो चुके थे। उसने सोचा कि चलो मैं एक दफ़ा यह कह देता हूं, फिर फांसी से बचने के बाद दोबारा इक़रार कर लूंगा। चुनांचे उसने कह दिया कि ख़ुदा मौजूद नहीं है। ऐन उस लम्हे में खींचनेवाले ने फंदा खींच दिया और मूं उस इबादतगुजार की कुछ पर मीत आ गई।

Shaitan से बचने की दुआ

इससे अंदाज़ा लगाइए कि यह कितनी लाँग टर्न प्लानिंग करके इंसान की गुनाह के क़रीब करता चला जाता है, उससे इंसान नहीं बच सकता, अल्लाह ही उससे बचा सकता है। लिहाज़ा अल्लाह रब्बुल इज़्ज़त के हुज़ूर यूं दुआ मांगनी चाहिए।

(ऐ अल्लाह ! हमें शैतान मद के शर से महफ़ूज़ फ़रमा। ऐ परवरदिगार में आपकी पनाह मांगता हूं इससे कि शतान मेरे पास आए ।)

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