इन्सानों का कब्रों से निकलना Maidan-e-Hashr| काफिरों की आंखें कैसे होंगी? | Dawat-e-Tabligh

Maidan-e-Hashr
"और हम उनको क़ियामत के दिन अंधे, बहरे, गूंगे करके चेहरों के बल चलाएंगे,' कब्रों से बे-ख़त्ना के निकलेंगे। आपस में कहते होंगे कि दुनिया में बस तुम दस दिन रहे।'....  इन्सानों का कब्रों से निकलना हज़रत अब्दुल्ला बिन उमर  रिवायत फ़रमाते हैं कि प्यारे नबी ने इरशाद फरमाया कि सबसे पहले ज़मीन फटकर मुझे ज़ाहिर करेगी; फिर अबू बक्र  व हज़रत उमर क़ब्रों से जाहिर होंगे। फिर बकी (कब्रिस्तान) में जाऊंगा। इसलिए वे (क़ब्रों से निकल कर ) मेरे साथ जमा कर दिए जाएंगे। फिर मैं मक्का वालों का इन्तिज़ार करूंगा, (यहां तक कि वे भी क़ब्रों से निकल कर मेरे साथ हो जाएंगे) फिर मैं हरमैन (वालों) के दर्मियान (महशर में) जमा हो जाऊंगा। जिन्को kabar में दफ़न ना किया हो उनका क्या होगा ? जो लोग क़ब्रों…
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