मां-बाप apna हक कब मांगे गे ? | जानवरों का बदला | Dawat-e-Tabligh

मां-बाप apna हक कब मांगे गे ? | जानवरों का बदला | Dawat-e-Tabligh

Maidan-e-Hashr
मांग पूरी करने पर मां-बाप इसरार करते रहेंगे बल्कि यह तमन्ना करेंगे कि काश! इस पर हमारा और भी ज्यादा कर्ज होता। जिस जानवर के लात मारी गयी थी, मां-बाप apna हक कब मांगे गे ?| जानवरों का बदला | Dawat-e-Tabligh मां-बाप apna हक कब मांगे गे ?| जानवरों का बदला | Dawat-e-Tabligh कियामत के दिन सबसे बड़ा ग़रीब  हज़रत अबू हुरैरः से रिवायत है कि आहज़रत ने एक बार अपने सहाबा से सवाल फरमाया, क्या तुम जानते हो कि ग़रीब कौन है? सहाबा ने अर्ज़ किया हम तो उसे गरीब समझते हैं कि जिसके पास दिरहम (रुपया-पैसा) और माल व अस्वाब न हो। इसके जवाब में आहज़रत सैयदे आलम ने इर्शाद फ़रमाया कि बेशक मेरी उम्मत में से (हकीकी) मुफ़्लिस वह है जो कियामत के दिन नमाज़ और रोज़े…
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