क्या मरने(मृत्यु) के बाद Jannat\ jahannam(Hell) में जाना है?| Prophet Mohammad  कि आखिरी बात| Dawat-e-Tabligh

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क्या मरने(मृत्यु) के बाद Jannat\ jahannam(Hell) में जाना है?| Prophet Mohammad  कि आखिरी बात| Dawat-e-Tabligh मनुष्य की एक और कमज़ोरी मनुष्य की यह कमज़ोरी रही है कि वह अपने बाप दादा और बुजुर्गों की ग़लत बातों को भी आंख बन्द करके मानता चला जाता हे, चाहे बुद्धि और तर्क उन बातों का साथ नहीं दे रहे हों, लेकिन इसके बावजूद मनुष्य पारिवारिक बातों पर जमा रहता है और इसके विरुद्ध अमल तो क्या, कुछ सुनना भी पसन्द नहीं करता। Prophet Mohammad की तकलीफ यही कारण था कि 40 साल की आयु तक मुहम्मद (सल्ल.) का सम्मान करने और सच्चा मानने और जानने के बावजूद मक्का के लोग अल्लाह के सन्देष्टा के रूप में अल्लाह की ओर से लायी गयी आपकी शिक्षाओं के दुश्मन हो गए। आप जितना अधिक लोगों को सबसे बड़ी सच्चाई शिर्क के विरुद्ध एकेश्वरवाद की…
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सच्चा धर्म केवल एक है| सच की आवाज़| Dawat-e-Tabligh

सच्चा धर्म केवल एक है| सच की आवाज़| Dawat-e-Tabligh

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ईमानदार सच की आवाज़|  इसी प्रकार सबसे बड़ा सदकर्म "ईमान" है, जिसके बारे में दुनिया के समस्त धर्म वाले यह कहते हैं कि सब कुछ यहीं छोड़ जाना है, मरने के बाद आदमी के साथ केवल ईमान जाएगा। ईमानदार या ईमान वाला उसे कहते हैं जो हक देने वाला हो, इसके विपरीत हक मारने वाले को ज़ालिम व काफिर (इन्कारी) कहते हैं। मनुष्य पर सबसे बड़ा हक उसके पैदा करने वाले का है। वह यह कि सबको पैदा करने वाला, जीवन और मृत्यु देने वाला स्वामी, पालनहार और उपासना के योग्य केवल अकेला अल्लाह है, तो फिर उसी की उपासना की जाए, उसी को स्वामी, लाभ हानि, सम्मान व अपमान देने वाला समझा जाए और उसके दिए हुए जीवन को उसकी इच्छा व आज्ञा अनुसार बसर किया जाए। उसी को…
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Real कामयाबी kisme hai? |Hazratji Molana Yousuf Bayan in Hindi| Dawat-e-Tabligh

Real कामयाबी kisme hai? |Hazratji Molana Yousuf Bayan in Hindi| Dawat-e-Tabligh

Hazratji Molana Yousuf 
मरने से पहले-पहले इस बात को दिल में उतार ले कि हुजूर सल्ल० के तरीक़े में इस्तेमाल होने में कामयाबी है और मुल्क व माल के चीथड़ों में कोई कामयाबी नहीं, इसको अपने पे खोल ले। मरने से पहले-पहले तेरे दिल पे खुल जाए,  रईसुत्तब्लीग़ हजरत मौलाना मुहम्मद यूसुफ़ नव्वरल्लाहु मरदहू ने यह तकरीर दिल पज़ीर अपनी वफ़ात से एक हफ्ता पहले गुजरानवाला में जुमा की नमाज़ से पहले फ़रमाई थी, गोया यह आपकी जिंदगी का आखिरी जुमा था, जिसमें आपने यह तकरीर फ़रमाई। इससे अगले जुमा यानी 2 अप्रैल 1965 ई० को लाहौर बिलाल पार्क में आपका विसाल हो गया और आप हम सबको सोगवार छोड़कर अपने ख़ालिक हक़ीकी से जा मिले। इन्ना लिल्लाहि व इन्ना इलैहि राजिऊन० मुरत्तिव : मीर अब्दुल हलीम, गुजरानवाला real कामयाबी kisme hai? Allah…
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