सिफ़ारीश किन के लिए होगी ? | बच्चे का (इंतिकाल) मरना कैसा है ? | Dawat-e-Tabligh

सिफ़ारीश किन के लिए होगी ? | बच्चे का (इंतिकाल) मरना कैसा है ? | Dawat-e-Tabligh

Maidan-e-Hashr
मौजूदगी में बच्चे का इंतिकाल हो जाए। बच्चे की मौत पर जो मां-बाप को ग़म होता है। अगर अधूरा बच्चा गिर गया तो वह भी मां-बाप को... । सिफ़ारीश किन के लिए होगी ? | बच्चे का (इंतिकाल) मरना कैसा है ? | Dawat-e-Tabligh सिफ़ारीश किन के लिए होगी ? | बच्चे का (इंतिकाल) मरना कैसा है ? | Dawat-e-Tabligh शफाअत क़ियामत में शफाअत भी अल्लाह जल्ल ल शानुहू क़ुबूल फरमाएंगे और उससे ईमान वालों को बड़ा नफा पहुंचेगा। आंहज़रत सैयदे आलम ने इर्शाद फ़रमाया है कि कियामत के दिन तीन गिरोह शफाअत करेंगे। 1) अंबिया किराम अलैहिमुस्सलातु वस्स्लाम, 2) उलमा और 3) शुहदा' लेकिन शफाअत वही कर सकेगा, जिसे अल्लाह तआला की तरफ से शफाअत करने की इजाज़त होगी। जैसा कि आयतल कुर्सी में फ़रमाया : मन जल्लजी यशफर…
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हौज़े कौसर से किन्को हटाया जयेगा ?| हौज़े कौसर की ख़ूबियां | Dawat-e-Tabligh

हौज़े कौसर से किन्को हटाया जयेगा ?| हौज़े कौसर की ख़ूबियां | Dawat-e-Tabligh

Maidan-e-Hashr
एक परनाला सोने का और दूसरा चांदी का होगा। ' मेरे और उनके दर्मियान आड़ लगा दी जाएगी और वे पीने से महरूम रह जाएंगे। हौज़े कौसर से किन्को हटाया जयेगा ?| हौज़े कौसर की ख़ूबियां | Dawat-e-Tabligh.... हौज़े कौसर से किन्को हटाया जयेगा ?| हौज़े कौसर की ख़ूबियां | Dawat-e-Tabligh हौज़े कौसर हश्र के मैदान में बड़ी भारी तादाद में हौज़ होंगे। आहज़रत सैयदे आलम ने फरमाया कि हर नबी का एक हौज़ होगा और सब नबी आपस में इस पर फन करेंगे कि किस के पास पीने वाले ज़्यादा आते हैं (हर नबी के हौज़ से उसके उम्मती पानी पीएंगे) और मैं उम्मीद करता हूं कि सबसे ज़्यादा लोग मेरे पास पीने के लिए आएंगे। हज़रत मुहम्मद के हौज़े कौसर की ख़ूबियां हज़रत अब्दुल्लाह बिन अम्र रिवायत फ़रमाते हैं कि आंहज़रत…
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Prophet Mohammad कहा मिलेंगे ?| Prophet Mohammad के उम्मती होन की पहचान |हम सब का सरदार कौन है?| Dawat-e-Tabligh

Maidan-e-Hashr
आपको कहां तलाश करूं? इन तीनों जगहों में से किसी एक जगह ज़रूर मिल जाऊंगा। हश्र के मैदान में प्यारे नबी के बुलन्द मर्तबे का ज़ुहूर..... Maiden-e-hashr में prophet Mohammad का मर्तबा हश्र के मैदान में प्यारे नबी के बुलन्द मर्तबे का ज़ुहूर शिफाअते कुबरा, मकामे महमूद, उम्मते मुहम्मदिया की बड़ाई हज़रत अबू सईद खुदरी रिवायत फ़रमाते हैं कि आंहज़रत सैयदे आलम ने इर्शाद फरमाया कि क़ियामत के दिन आदम की तमाम औलाद का मैं सरदार हूंगा (यानी सरदार होना सब पर साफ़ हो जाएगा। गो हक़ीक़त में सरदार अब भी आप ही हैं) और मैं इस पर फन नहीं करता हूं (बल्कि यह ब्यान हक़ीकत और नेमत का इज़हार है); और मेरे हाथ में हम्द का झंडा होगा और मैं इस पर फख़ नहीं करता हूं; और उस दिन…
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