Tahajjud ki कविता Web Stories |अल्लाह की तरफ़ से – Dawat-e-Tabligh

मांगने वाला हो ! जो रिज़्क का तालिब हो मैं रिज़्क उसे दूंगा ! वह माइले तौबा हो मैं माइले बख्शिश हूँ ! वह अपने गुनाहों की कसरत से न घबराये ! मैं रहम से बख़्शृंगा वह शर्म से पछताये ! Tahajjud ki कविता Web Stories |अल्लाह की तरफ़ से – Dawat-e-Tabligh…

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Tahajjud ki कविता |अल्लाह की तरफ़ से – Dawat-e-Tabligh

तहज्जुद के वक्त अल्लाह की तरफ़ से निदा

मैं नूर के तड़के में जिस वक्त उठा सोकर!

अल्लाह की रहमत के दरवाजे खुले पाये !

आती थी सदा पैहम जो मांगने वाला हो !

हाथ अपनी अकीदत से आगे मेरे फैलाये !

जो रिज़्क का तालिब हो मैं रिज़्क उसे दूंगा !

जो तालिबे जन्नत हो जन्नत की तलब लाये !

जिस-जिस को गुनाहों से बख़्शिश की तमन्ना हो !

वह अपने गुनाहों की कसरत से न घबराये !

वह माइले तौबा हो मैं माइले बख़्शिश हूँ !

मैं रहम से बख़्शृंगा वह शर्म से पछताये !

यह सुन के हुए जारी आँखों से मेरी आँसू !

क़िस्मत है मुहब्बत में रोना जिसे आ जाये !

आकाए गदा परवर साइल हूँ तेरे दर पर !

मैं और तो क्या मागूं तू ही मुझे मिल जाये !

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