Ummat-e- Mohammad होने ki tamanna Web Stories|Ummat पर 3 बातो का Dar -Dawat-e-Tabligh

Ummat-e- Mohammad पर तीन बातों का ख़ौफ़, Mohammad सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम का मामला in Hindi Ummat-e- Mohammad होने ki tamanna Web Stories|Ummat पर 3 बातो का Dar -Dawat-e-Tabligh….

Ummat-e- Mohammad होने ki tamanna Web Stories|Ummat पर 3 बातो का Dar -Dawat-e-Tabligh
Ummat-e- Mohammad होने ki tamanna Web Stories| Ummat पर 3 बातो का Dar -Dawat-e-Tabligh

Ummat-e- Mohammad होने ki tamanna

उम्मते मुहम्मदिया की ख़ास सिफ़ात अलवाहे – मूसा में और हज़रत मूसा अलैहिस्सलाम की हुज़ूर सल्ल० का सहाबी होने की ख्वाहिश के बारे में हज़रत क़तादा रहमतुल्लाहि अलैह ने कहा है कि हज़रत मूसा अलैहिस्सलाम ने कहा, या रब! मैं अल्वाह में लिखा पाता हूँ कि एक बेहतरीन उम्मत होगी जो हमेशा अच्छी बातों को सिखाती रहेगी और बुरी बातों से रोकती रहेगी, ऐ ख़ुदा वह उम्मत मेरी उम्मत हो। तो अल्लाह ने फ़रमाया, मूसा वह तो अहमद की उम्मत होगी। फिर कहा या रब! इन अल्वाह से एक ऐसी उम्मत का पता चलता है जो सबसे आखिर में पैदा होंगी लेकिन जन्नत में सबसे पहले दाख़िल होगी, ऐ खुदा! वह मेरी उम्मत हो । अल्लाह ने फ़रमाया वह अहमद की उम्मत है। फिर फ़रमाया, या रब ! उस उम्मत का कुरआन उनके सीनों में होगा दिल में देखकर पढ़ते होंगे हालांकि उनसे पहले के सब ही लोग अपने कुरआन पर नज़र डाल कर पढ़ते हैं, दिल से नहीं पढ़ते, यहां तक कि उनका क़ुरआन अगर हटा लिया जाये तो फिर उनको कुछ भी याद नहीं और न वह कुछ पहचान सकते हैं। अल्लाह ने उनको हिफ्ज़ की ऐसी कुव्यत दी है कि किसी उम्मत को नहीं दी गई। या रब! 1 वह मेरी उम्मत हो कहा ऐ मूसा वह तो अहमद की उम्मत है फिर कहा, या रब ! वह उम्मत तेरी हर किताब पर ईमान लाएगी। वह गुमराहों और काफ़िरों से क़ताल करेंगे यहां तक कि काना दज्जाल से भी लड़ेंगे। इलाही वह मेरी उम्मत हो ।

खुदा ने कहा कि यह अहमद की उम्मत होगी। फिर मूसा अलैहिस्सलाम ने कहा या रब अल्वाह में एक ऐसी उम्मत का जिक्र है कि वह अपने नज़राने और सद्क़ात खुद आपस के लोग ही खा लेंगे। हालांकि उस उम्मत से पहले तक की उम्मतों का यह हाल है कि अगर वह कोई सद्का या नज़र पेश करते और वह क़बूल होती तो अल्लाह आग को भेजते और आग उसे खा जाती और अगर क़बूल न होती और रद्द हो जाती तो फिर वह उसको न खाते बल्कि दरिन्दे और परिन्दे आकर खा जाते और अल्लाह उनके सद्क़ उनके अमीरों से लेकर उनके गरीबों को देगा। या रब ! वह मेरी उम्मत हो तो फ़रमाया यह अहमद की उम्मत होगी। फिर कहा या रब! मैं अल्वाह में पाता हूँ कि वह अगर कोई नेकी का इरादा करेगी लेकिन अमल में न ला सकेगी तो फिर भी एक सवाब की हक़दार हो जाएगी और अगर अमल में लाएगी तो दस हिस्से सवाब मिलेगा बल्कि सात सौ हिस्से तक, ऐ ख़ुदा वह मेरी उम्मत हो तो फ़रमाया कि वह अहमद की उम्मत है। फिर कहा कि अल्वाह में है कि वह दूसरों की शफाअत भी करेंगे और उनकी शफाअत भी दूसरों की तरफ़ से होगी, ऐ ख़ुदा यह मेरी उम्मत हो तो 1 कहा नहीं, यह अहमद की उम्मत होगी। क्रतादा रहमतुल्लाह अलैह कहते हैं कि मूसा अलैहिस्सलाम ने फिर अल्वाह रख दीं और कहा काश मैं  मुहम्मद का सहावी होता!

 – तपसीर इब्ने कसीर, हिस्सा 2, पेज 223-224

Ummat-e- Mohammad पर किन बातो का Dar

  • उम्मते मुहम्मदिया पर तीन बातों का ख़ौफ़

एक हदीस में आप सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम ने इर्शाद फ़रमाया कि मुझे अपनी उम्मत पर तीन बातों का खौफ है अव्वल यह कि माल बहुत मिल जाए जिसकी वजह से आपस में हसद में मुब्तला हो जायें और कुल व खून करने लगें दूसरी यह कि अल्लाह की किताब सामने खुल जाये (यानी तर्जमे के ज़रिये हर आमी और जाहिल भी उसको समझने का मुद्दआ हो जाये) और उसमें जो बातें समझने की नहीं हैं, यानी मुताशाबिहात उनके मानी समझने की कोशिश करने लगें, हालांकि इनका मतलब अल्लाह ही जानता है। तीसरी यह कि उनका इल्म बढ़ जाया तो उसे जाये कर दें और इल्म को बढ़ाने की जुस्तजू छोड़ दें।

– मआरिफुल कुरआन, हिस्ता 2, पेज 21

Ummat-e-Mohammad पर 3 बातो का Dar Web Stories

  • रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम की रिफ़ाक़त किसी रंग व नसल पर मौक़ूफ़ नहीं

तिबरानी ने मुअजम-अल-कबीर में हज़रत अब्दुल्लाह बिन उमर रज़ियल्लाहु अन्हु की यह रिवायत नक़ल की है कि एक शख्स हब्शी आंहज़रत सल्ल० की ख़िदमत में हाज़िर हुआ और अर्ज किया या रसूलुल्लाह आप हमसे हुस्ने सूरत और हसीन रंग में भी मुमताज़ हैं और नुबूव्वत व रिसालत में भी अब अगर मैं भी इस चीज़ पर ईमान ले आऊं जिस पर आप सल्ल० ईमान रखते हैं और वही अमल करूं जो आप सल्ल० करते हैं तो क्या मैं भी जन्नत में आप सल्ल० के साथ हो सकता हूँ।

आहज़रत सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम ने फ़रमाया, हाँ जरूर! (तुम अपनी हथियाना बदसूरती से न घबराओ) क़सम है उस जात की जिसके क़ब्ज़े में मेरी जान है जन्नत में काले रंग के हब्शी सफ़ेद और हसीन हो जाएंगे और एक हज़ार साल की दूरी से चमकेंगे, और जो शख्स ला इलाहा इल्लल्लाह का मानने वाला है उसकी फ़लाह व नजात अल्लाह तआला के ज़िम्मे हो जाती है, और जो शख़्स सुब्हानल्लाहि व बिहम्दिही पढ़ता है उसके नामा-ए-आमाल में एक लाख चौबीस हज़ार नेकियाँ लिखी जाती हैं।

यह सुनकर मज्लिस में से एक शख्स ने अर्ज़ किया या रसूलुल्लाह ! जब अल्लाह तआला के दरबार में हसनात की इतनी सखावत है तो फिर हम कैसे हलाक हो सकते हैं या अज़ाब में कैसे गिरफ्तार हो सकते हैं? आप सल्ल० ने फ़रमाया (यह बात नहीं) हक़ीक़त यह है कि क़ियामत में कुछ आदमी इतना अमल और हसनात लेकर आएंगे कि अगर उनको पहाड़ पर रख दिया जाये तो पहाड़ भी उनके बोझ को बर्दाश्त न कर सके लेकिन इसके मुक़ाबले में जब अल्लाह तआला की नेमतें आती हैं और उनका मवाना किया जाता है तो इंसान का अमल उनके मुक़ाबले में ख़त्म हो जाता है, मगर यह कि अल्लाह तआला ही उसको रहमत से नवाज़ें |

उस हब्शी के सवाल व जवाब ही पर सूर : दहूर की आयत नाज़िल हुई,

हब्शी ने हैरत से सवाल किया या रसूलुल्लाह ! मेरी आँखें भी उन नेमतों को देखेंगी जिनको आप सल्ल० की मुबारक आँखें मुशाहिदा करेंगी? आप सल्ल० ने फ़रमाया हाँ जरूर। यह सुनकर हब्शी नव-मुस्लिम ने रोना शुरू किया यहां तक कि रोते-रोते वहीं जान दे दी और आंहज़रत सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने अपने दस्ते – मुबारक से उसकी तज्हीज़ व तक्फ़ीन फ़रमाई । -मआरिफुल कुरआन, हिस्सा 2, पेज 469 

– तफ़्सीर मज़हरी में भी तकरीबन यही रिवायत मौजूद है।

Mohammad सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम का मामला

  • हज़रत हुज़ैफ़ा रज़ियल्लाहु अन्हु के साथ आप सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम का मामला

हज़रत हुने रज़ियल्लाहु अन्हु फरमाते हैं कि मैंने रमजान के महीने में हुजूर सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम के साथ पढ़ी फिर आप सल्ल० खड़े होकर नहाने लगे तो मैंने आप के लिए पर्दा किया। (गुस्ल के बाद) बर्तन में कुछ पानी बच गया, हुजूर सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम ने फ़रमाया अगर तुम चाहो तो इसी से गुस्ल कर लो और चाहो तो इसमें और पानी मिला लो मैंने कहा या रसूलुल्लाह आपका बचा हुआ पानी मुझे और पानी से ज़्यादा महबूब है। चुनांचे मैंने उसी से गुस्ल किया और हुजूर सल्ल० मेरे लिए पर्दा करने लगे तो मैंने कहा आप मेरे लिए पर्दा न करें। हुजूर सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने फ़रमाया नहीं जिस तरह तुमने मेरे लिए पर्दा किया उसी तरह मैं भी तुम्हारे लिए ज़रूर पर्दा करूंगा

-हयातुस्सहावा, हिस्सा 2, पेज 867

  • Badshah ka इंसाफ़ na karna | Logo ka paisa (Tax) बिना पूछे इस्तमाल करना – Dawat~e~Tabligh

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  • Talak se Bachne ka Waqia |Pati ka patni ke liye Pyar – Dawat~e~Tabligh

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  • Dil रो रहा है पर आंखो में आसु नहीं | दिल की बीमारी को दूर करने का नुस्खा- Dawat~e~Tabligh

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