Allah तेरी रहमत तो हर एक पर आम है Kavita

Allah तेरी रहमत तो हर एक पर आम है Kavita

जबसे होंटों पे या रब तेरा नाम है, 

तेरे बीमार को काफ़ी आराम है। 

तूने बख़्शा हमे नूरे इस्लाम है, 

हमपे तेरा हक़ीक़ी यह इनआम है। 

जिसको तेरी ख़ुदाई से इंकार है, 

बादशाहत में रहकर भी नाकाम है।

रूठता है ज़माना अगर रूठ जाए,

 राज़ी करना तुझे बस मेरा काम है। 

आसमानों की दुनिया में है मुहतरम, 

तेरी ख़ातिर जो दुनिया में बदनाम है।

अपने मुंकर को भी रिज़्क़ देता है,

तेरी रहमत तो हर एक पर आम है।

हां क़दम का उठाना मेरा काम है, 

पार बेड़ा लगाना तेरा काम है।

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